ब्लिट्ज ब्यूरो
वसई। वसई-विरार में पानी की कमी को पूरा करने के लिए मनपा ने देहरजी, सुसरी और खोलसापाडा झीलें बनाने का फैसला लिया है। इस योजना के तहत भविष्य में शहर में पानी की कमी नहीं होगी। खोलसापाडा झील का काम 90% हो चुका है। इस योजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है। दो फेज वाले इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही वसई-विरार के लोगों को करीब 65 मिलियन लीटर पानी मिलने लगेगा।
बता दें कि वसई-विरार शहर की आबादी लगभग 30 लाख हो गई है। मुंबई मेट्रोपॉलिटन डिवेलपमेंट अथॉरिटी के प्रस्तावित प्लान में अनुमान लगाया गया है कि अगले 20 सालों में वसई-विरार शहर की आबादी लगभग 45 लाख हो जाएगी। बढ़ती आबादी और पानी की मांग को ध्यान में रखते हुए तीन पानी की योजनाएं- देहरजी, सुसारी और खोलसापाडा प्रस्तावित की गई हैं।
हाल ही में सिंचाई अधिकारी और पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर के साथ एक मीटिंग हुई। इस मीटिंग में इन सभी योजनाओं के काम का रिव्यू किया गया। खोलसापाड़ा योजना के डैम का 90% काम पूरा हो चुका है। इस प्रोजेक्ट में रुकावट बने 18 वन अधिकार दावों को मंजूरी दे दी गई है, जबकि 12 दावे पेंडिंग हैं। इससे योजना का रास्ता साफ हो गया है।
इस योजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यह जानकारी देते हुए बविआ के सभागृह नेता प्रफुल्ल साने ने कहा कि खोलसापाडा वॉटर सप्लाई स्कीम के तहत कुल दो डैम हैं। वसईकरों को हर दिन फेज 1 से 50 मिलियन लीटर और फेज 2 से 15 मिलियन लीटर पानी मिलेगा।
वसई-विरार शहर को प्रस्तावित सुसरी डैम से 200 मिलियन लीटर और देहरजी डैम से 190 मिलियन लीटर पानी मिलेगा। वर्तमान में वसई-विरार शहर को सूर्या डैम फेज 1 और 3 से कुल 200 मिलियन लीटर, सूर्या वॉटर प्रोजेक्ट से 170 मिलियन लीटर, उसगांव डैम से 20 मिलियन लीटर और पेल्हार डैम से 10 मिलियन लीटर पानी सप्लाई होता है।
क्यों आई नई झीलें बनाने की नौबत ?
बीते कुछ सालों में वसई-विरार की आबादी में काफी तेजी से इजाफा हुआ है। बढ़ती आबादी के साथ यहां पानी के लिए कई बार आंदोलन भी हुए है। धीरे-धीरे यह पॉलिटिकल मुद्दा भी बनता जा रहा हैं। बढ़ती जन समस्या को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक दलों ने मनपा क्षेत्र में पानी सप्लाई के विकल्पों पर मंथन शुरू किया और नतीजन तीन नई झीलें तैयार करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।













