ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि पति को खाना पकाने, घर की साफ-सफाई करने और कपड़े धोने जैसे घरेलू कामकाज में समान रूप से हाथ बंटाना होगा, क्योंकि उसने किसी घरेलू सहायिका से नहीं, बल्कि जीवन संगिनी से शादी की है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह टिप्पणी की, जो कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने संबंधी एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। उच्च न्यायालय ने क्रूरता के आधार पर तलाक को मंजूरी देने संबंधी अधीनस्थ अदालत के आदेश को रद कर दिया था। उच्चतम न्यायालय के वकील ने दलील दी कि दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता विफल रही। न्यायालय में सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के
वकील ने कहा कि उन दोनों का विवाह मई 2017 में हुआ था और 2019 से वे अलग रह रहे हैं। वकील ने कहा कि मैं (व्यक्ति) तलाक चाहता हूं। अधीनस्थ अदालत ने क्रूरता के आधार पर तलाक को मंजूरी दे दी।













