ब्लिट्ज ब्यूरो
जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग ने एमए पाठ्यक्रम से पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और कवि-दर्शनशास्त्री मोहम्मद इकबाल से जुड़े विषयों को हटाने की सिफारिश कर दी है। यह फैसला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के विरोध प्रदर्शन के बाद लिया गया है। बता दें कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विगत दिवस विश्वविद्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया था, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत संशोधित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में शामिल जिन्ना पर आधारित अध्याय को तत्काल हटाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देश के विभाजन और दो-राष्ट्र सिद्धांत के प्रमुख प्रतीक जिन्ना जैसे व्यक्तियों को छात्रों को पढ़ाना अस्वीकार्य है।
एबीवीपी जम्मू-कश्मीर के सचिव सन्नक श्रीवत्स ने कहा कि ऐसे पाठ्यक्रम छात्रों में गलत संदेश देते हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो विरोध और तेज होगा तथा अल्पसंख्यकों के हितों के लिए सकारात्मक योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को शामिल करने की मांग की। इसके जवाब में विश्वविद्यालय ने एक समिति गठित की, जिसकी बैठक आज (22 मार्च) हुई।
विभागाध्यक्ष प्रोफेसर बलजीत सिंह मान ने बताया कि संकाय और विभागीय मामलों की समिति ने सर्वसम्मति से एक वर्षीय तथा दो वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम के पाठ्यक्रम से जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद इकबाल संबंधित विषयों को हटाने का फैसला लिया है। यह सिफारिश अब अध्ययन बोर्ड (बोर्ड ऑफ स्टडीज बीओएस) के समक्ष रखी गई है। प्रोफेसर मान ने बताया कि बीओएस की आगली बैठक ऑनलाइन होगी, जहां इस पर अंतिम विचार-विमर्श होगा।
इससे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने पाठ्यक्रम का बचाव करते हुए कहा था कि ‘आधुनिक भारतीय राजनीतिक विचार’ मॉड्यूल में सर सैयद, इकबाल, सावरकर, गोलवलकर, गांधी, अंबेडकर, नेहरू और पटेल जैसे विविध विचारकों को शामिल करना शुद्धतः शैक्षणिक है और यूजीसी दिशानिर्देशों के अनुरूप है। उन्होंने तर्क दिया था कि ये सभी विचारक विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं और ऐतिहासिक समझ के लिए उनका अध्ययन आवश्यक है।













