ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। अमेरिका को हायर एजुकेशन के लिए भारतीय छात्रों का पसंदीदा देश माना जाता रहा है। मगर अब स्थिति बदल रही है और आंकड़ों में भी इसकी तस्वीर दिखने लगी है। भारतीय छात्रों की अमेरिका जाकर पढ़ाई करने को लेकर दिलचस्पी घट रही है। इसके पीछे कई फैक्टर्स हैं, जैसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार की नीतियां और डिग्री होने के बाद भी जॉब को लेकर अनिश्चितता का माहौल। इस बीच भारत सरकार ने अमेरिका में भारतीय छात्रों से जुड़ा एक ऐसा आंकड़ा पेश किया है, जो चौंकाने वाला है।
सरकार ने संसद में बताया है कि फरवरी 2026 तक अमेरिका में प्राइमरी एजुकेशन से लेकर यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले भारतीयों छात्रों की संख्या 3.5 लाख से ज्यादा रही है। मगर इससे पिछले साल की इसी अवधि के आंकड़ों की तुलना में भारतीय छात्रों की संख्या में लगभग 6.9 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। आसान भाषा में कहें तो 2025 तक अमेरिका में ज्यादा भारतीय पढ़ाई कर रहे थे। मगर फिर ट्रंप सरकार की वापसी हुई और इमिग्रेशन नीतियों को सख्त कर दिया गया। इस वजह से अब 2026 तक उनकी संख्या में गिरावट दर्ज की गई।
किस सवाल के जवाब में सरकार ने बताए आंकड़े?
दरअसल, विदेश मंत्रालय से पूछा गया था कि क्या अमेरिका में भारतीय छात्रों के एडमिशन में गिरावट देखी गई है, वीजा स्लॉट को लेकर किल्लत किस स्तर की है और वीजा रिजेक्शन का उच्च स्तर इसमें किस हद तक योगदान दे रहा है? सवाल के लिखित जवाब में, विदेश मामलों के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा के साथ अमेरिकी गृह मंत्रालय के ‘स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफोर्मेशन सिस्टम’ (सेविस) मैपिंग टूल द्वारा जारी किए गए कुछ आंकड़े साझा किए।
आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2025 में अमेरिका में अलग-अलग कोर्सेज (प्राइमरी, सेकेंडरी, वोकेशनल कोर्स, हाई स्कूल, लैंग्वेज ट्रेनिंग, फ्लाइट स्कूल, एसोसिएट, बैचलर्स, मास्टर्स, डॉक्टरेट और अन्य) में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की कुल संख्या 3,78,787 थी, जो फरवरी 2026 में घटकर 3,52,644 हो गई। मंत्री ने आगे कहा कि यह आंकड़ा अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के कुल नामांकन में लगभग 6.9 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।













