ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों और सरकारी संस्थानों में रोजाना ‘वंदे मातरम’ गाने को अनिवार्य बनाने वाले केंद्र सरकार के सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिका को ‘प्री-मैच्योर’ करार देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार की निर्देशिका या सलाह के आधार पर किसी के साथ भेदभाव हो रहा हो तो सुनवाई का कोई अर्थ होगा, इसलिए सुनवाई की जरूरत नहीं है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि सरकार की एडवाइजरी या निर्देशिका के आधार पर अगर किसी के साथ कोई भेदभाव या जबरदस्ती होती है, तभी अदालत दखल देगी। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या सरकार की अधिसूचना में ऐसा कुछ है कि अगर कोई व्यक्ति इसे नहीं गाता है तो उसे बाहर निकाल दिया जाएगा या उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी? इस पर याचिकाकर्ता के वकील संजय हेगड़े ने कहा कि इसमें अगर कोई बाधा डालता है तो उसके लिए दंड का प्रावधान है।













