ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। कई छात्र गणित को केवल सूत्रों और जटिल हल याद करने तक सीमित समझते हैं, जिससे इस विषय के प्रति डर पैदा हो जाता है। परिणामस्वरूप वे गणित के वास्तविक उपयोग को समझ नहीं पाते। ऐसे में युवाओं के लिए जरूरी है कि वे पारंपरिक रटने वाली पद्धति से आगे बढ़कर ‘मैथ-ईश थिंकिंग’ को अपनाएं। यह तरीका गणित को आसान, व्यावहारिक और दिलचस्प बनाने में मदद करता है।
‘मैथ-ईश थिंकिंग’ का मुख्य उद्देश्य हर सवाल का बिल्कुल सटीक उत्तर निकालना नहीं, बल्कि उसे समझना और अनुमान के आधार पर हल करना है। इसमें यह जरूरी नहीं होता कि हर बार उत्तर पूरी तरह सही हो, बल्कि यह देखा जाता है कि उत्तर किस दायरे में आ सकता है। यह सोच छात्रों को यह समझने में मदद करती है कि वे जिन नियमों और सूत्रों का उपयोग कर रहे हैं, वे वास्तव में कितने स्पष्ट हैं।
उदाहरण के तौर पर, हम रोजमर्रा की जिंदगी में भी कई निर्णय अनुमान के आधार पर लेते हैं। जैसे किसी स्थान तक पहुंचने का समय हम सटीक नहीं, बल्कि लगभग तय करते हैं। इसी तरह गणित में भी पहले अनुमान लगाने की आदत विकसित करने से सवाल हल करना आसान हो जाता है।
इससे छात्र तेजी से सोच पाते हैं और सही दिशा में आगे बढ़ते हैं। यह पद्धति खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत उपयोगी साबित होती है, जहां समय सीमित होता है। अनुमान के जरिए छात्र कई गलत विकल्पों को जल्दी हटा सकते हैं और सही उत्तर तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, भिन्नों को जोड़ते समय पहले उनके मान का अंदाजा लगाने से लंबी गणना की जरूरत कम हो जाती है।













