राजेश दुबे
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में नौ नए जजों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। यह फैसला न्यायपालिका में लंबित मामलों के निपटारे और न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। कॉलेजियम ने 11 और 12 मई को हुई बैठकों में यह प्रस्ताव पारित किया, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश ने की।
जजों की नियुक्ति प्रक्रिया कैसे होती है?
भारतीय न्यायिक व्यवस्था में हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति एक निर्धारित और चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत की जाती है, जिसे मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर कहा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य योग्य और अनुभवी उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित करना होता है।
प्रक्रिया इस प्रकार होती है:-
सबसे पहले संबंधित हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा जज नियुक्ति का प्रस्ताव तैयार किया जाता है।
इसके बाद यह प्रस्ताव राज्य के मुख्यमंत्री और राज्यपाल के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता है।
फिर यह फाइल केंद्र सरकार (कानून मंत्रालय) के पास पहुंचती है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम इस प्रस्ताव की समीक्षा कर अंतिम सिफारिश करता है।
अंत में भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी और गजट अधिसूचना जारी होने के बाद नियुक्ति को आधिकारिक रूप से प्रभावी माना जाता है।
इस पूरी प्रक्रिया का मकसद न्यायपालिका में पारदर्शिता बनाए रखना और योग्य न्यायाधीशों की नियुक्ति सुनिश्चित करना है।
कॉलेजियम प्रणाली की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम देश की न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर के लिए जिम्मेदार सर्वोच्च निकाय है। इसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश के साथ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
यह प्रणाली न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने और योग्य उम्मीदवारों के चयन को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
किन वकीलों को मिली नियुक्ति?
कॉलेजियम द्वारा जिन नौ वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नामों को मंजूरी दी गई है, वे इस प्रकार हैं:
इंद्रनील रॉय
आर्यक दत्त
अतारूप बनर्जी
संदीप कुमार दे
पार्थ प्रतिम रॉय
सुदीप देब
अनुज सिंह
अर्जुन राय मुखर्जी
रिशाद मेडोरा
इन सभी नामों को कलकत्ता हाई कोर्ट के जज पद पर नियुक्ति के लिए मंजूरी दी गई है।












