ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो, अगर त्वरित सुनवाई (स्पीडी ट्रायल) के अधिकार का उल्लंघन होता है तो जमानत पर विचार जरूरी है। इसी आधार पर अदालत ने हत्या के एक अंडरट्रायल आरोपी को जमानत दे दी, जो करीब चार साल से जेल में था और अब तक एक भी गवाह का बयान दर्ज नहीं हुआ था। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्पीडी ट्रायल का अधिकार मौलिक है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीरता अपनी जगह है, लेकिन सुनवाई में देरी होने पर आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में नहीं रखा जा सकता। आरोपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।












