महेश पांडेय
मथुरा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा ब्रज क्षेत्र के धार्मिक, सांस्कृतिक, पर्यटन, पर्यावरणीय एवं आधारभूत संरचना विकास को लेकर अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। आगामी वर्षों में भी ब्रज के प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास हेतु कई नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
तीर्थ यात्रियों एवं पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिषद द्वारा व्यापक स्तर पर योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ब्रजरज उत्सव, रंगोत्सव, कृष्णोत्सव, राधाष्टमी महोत्सव और सांझी महोत्सव अब मथुरा-वृन्दावन की सांस्कृतिक पहचान बन चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में मथुरा-वृन्दावन को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
ब्रज में आयोजित होने वाले इन भव्य आयोजनों में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंचते हैं। विशेष रूप से रंगोत्सव-2026 के दौरान 44 लाख से अधिक श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों ने ब्रज की पारंपरिक होली का आनंद लिया। वहीं वर्ष 2025 में मथुरा-वृन्दावन एवं ब्रज क्षेत्र के अन्य तीर्थ स्थलों पर लगभग 10.25 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया।
भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली मथुरा-वृन्दावन में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण के साथ आधुनिक सुविधाओं का अनुभव भी मिल रहा है। परिषद द्वारा यमुना के प्रमुख घाटों एवं कुंडों की साफ-सफाई, संरक्षण और जल शोधन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
ब्रज क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी क्रम में गोवर्धन स्थित चिह्नित धरोहरों के संरक्षण, जीर्णोद्धार तथा विद्युतीकरण कार्यों को आगे बढ़ाने की योजना तैयार की गई है। इसके अतिरिक्त कृष्णकालीन 36 वन एवं उपवनों को पुनः हरित और आकर्षक बनाने, वहां पर्यटन सुविधाओं के विस्तार तथा पर्यावरणीय स्वरूप को सुरक्षित रखने की दिशा में भी कार्य जारी है।
ब्रज क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए वृन्दावन परिक्रमा मार्ग के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत, इलेक्टि्रक बसों के संचालन को बढ़ावा, चार्जिंग स्टेशन स्थापना तथा ई-रिक्शा व्यवस्था को सुदृढ़ करने जैसे कार्य भी किए जा रहे हैं। परिषद द्वारा पार्किंग, ट्रैफिक प्रबंधन और यात्री सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने वर्ष 2025-26, 2026-27 एवं 2027-28 के लिए विभिन्न विभागों की प्रस्तावित परियोजनाओं का समन्वित खाका तैयार किया है। इसमें पर्यटन विकास, पर्यावरण संरक्षण, कुंडों एवं घाटों का पुनरोद्धार, प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण तथा धार्मिक स्थलों के आसपास आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को प्रमुखता दी गई है।
परिषद पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। यमुना संरक्षण, वर्षा जल निकासी, नालों के सुधार तथा जलभराव की समस्या के समाधान हेतु विभिन्न विभागों के साथ समन्वित कार्ययोजना बनाई गई है। वृक्षारोपण, हरित क्षेत्र विस्तार तथा ब्रज की पारंपरिक प्राकृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए भी अनेक योजनाएं प्रस्तावित हैं।
रंगोत्सव-2026 में होली पर 44 लाख श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने ब्रज की छटा निहारी
ब्रज क्षेत्र को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र बनाने का रोडमैप तैयार
इसके अतिरिक्त धार्मिक आयोजनों एवं मेलों के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वच्छता, पार्किंग और सुरक्षा प्रबंधन को मजबूत किया जा रहा है। विभिन्न नगर निकायों एवं विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर परिषद के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ब्रज क्षेत्र को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में परिषद की ये योजनाएं आने वाले समय में क्षेत्रीय विकास, पर्यटन वृद्धि और स्थानीय रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

अक्रूर घाट बनेगा ब्रज का नया धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र
द्वापर युगीन आस्था से जुड़ा अक्रूर घाट अब धार्मिक चेतना और पर्यटन विकास का नया केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार ने वृन्दावन स्थित यमुना नदी के दाहिने तट पर अक्रूर घाट के निर्माण एवं सौंदर्यीकरण हेतु 6.35 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी है जिसमें से 3.17 करोड़ रुपये की धनराशि जारी भी कर दी गई है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने मथुरा-वृन्दावन मार्ग स्थित इस पौराणिक महत्व के घाट के निर्माण कार्य को स्वीकृति प्रदान की है। यह स्थल भगवान श्रीकृष्ण एवं बलराम से जुड़ी कथाओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल मेले का आयोजन होता है।
परियोजना के अंतर्गत अक्रूर घाट पर व्यापक निर्माण कार्य किए जाएंगे। 30 मीटर लंबाई में 14 मीटर चौड़ाई एवं 5 मीटर गहराई तक शीट पाइलिंग की जाएगी। दोनों शीट पाइलों को जोड़ने के लिए प्रत्येक 3 मीटर पर 45 एमएम व्यास की एंकर बार लगाई जाएगी। 5 मीटर चौड़े स्नान प्लेटफॉर्म, घाट की सीढ़ियों एवं पटरे का निर्माण लाल पत्थरों से कराया जाएगा। घाट पर पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 220 मीटर लंबा चैनल भी विकसित किया जाएगा। अपस्ट्रीम एवं डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में स्लोप पिचिंग का कार्य कराया जाएगा।
जब अक्रूर जी ने पहचाना श्रीकृष्ण का परम दिव्य स्वरूप
मथुरा-वृन्दावन मार्ग पर यमुना तट स्थित अक्रूर घाट का अत्यंत पौराणिक एवं धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि जब कंस के बुलावे पर अक्रूर जी श्रीकृष्ण और बलराम को लेकर मथुरा जा रहे थे, तब इसी स्थान पर विश्राम के दौरान उन्होंने यमुना में स्नान किया।
स्नान करते समय अक्रूर जी को जल के भीतर भगवान विष्णु के चतुर्भुज स्वरूप में श्रीकृष्ण एवं बलराम के दिव्य दर्शन हुए। इस अलौकिक अनुभूति ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि श्रीकृष्ण कोई साधारण बालक नहीं बल्कि स्वयं भगवान नारायण के अवतार हैं। इसी कारण अक्रूर घाट आज भी श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक अनुभूति का पवित्र केंद्र बना हुआ है।












