ब्लिट्ज ब्यूरो
कोलंबो। श्रीलंका ने चीन के नियंत्रण वाले हंबनटोटा बंदरगाह के ठीक पास स्थित मट्टाला राजपक्षे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को 30 साल के पट्टे पर देने की घोषणा कर दी है। यानि श्रीलंका में हंबनटोटा बंदरगाह के बेहद करीब भारत के हाथ में सुनहरा मौका लगने वाला है। हंबनटोटा वही बंदरगाह है जिसे श्रीलंका ने 99 वर्षों के लिए चीनी कंपनी को लीज पर दे रखा है। इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया है कि भारत, श्रीलंका के उस फ़ैसले पर बारीकी से नजर रख रहा है जिसमें विदेशी निवेशकों को चीन के नियंत्रण वाले हंबनटोटा बंदरगाह के पास स्थित एक हवाई अड्डे का नियंत्रण सौंपने की बात कही गई है।
अगर भारत इस एयरपोर्ट पर दांव खेले तो ये फैसला हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक पकड़ बनाने की चाह रखने वाली भारतीय कंपनियों के लिए एक दुर्लभ अवसर साबित हो सकता है। हालांकि ये दुनिया के सबसे खाली एयरपोर्ट्स में से एक है और यहां वाणिज्यिक फायदा शून्य के बराबर है लेकिन देश हित सौ फीसदी है। दरअसल श्रीलंका सरकार ने हंबनटोटा में स्थित मट्टाला राजपक्षे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नियंत्रण अपने हाथ में लेने के लिए, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से 9 जून तक ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ यानी अपनी दिलचस्पी जाहिर करने का आह्वान किया है। यह नियंत्रण 30 साल के ‘बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर’ मॉडल के तहत दिया जाएगा।
आपको बता दें कि साल 2017 में चीन ने 99 वर्षों के लिए हंबनटोटा पोर्ट लीज पर श्रीलंका से ले लिया था। ये एक रणनीतिक बंदरगाह है जो सीधे तौर पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
इसीलिए अगर इस हवाई अड्डे की कमान किसी भारतीय कंपनी के पास आ जाती है तो हंबनटोटा में चीनी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है।
श्रीलंका ने इस बार निवेशकों को दो विकल्प दिए हैं। पहला- हवाई अड्डे का संचालन और दूसरा- इसके पास की 238 हेक्टेयर भूमि का विकास।
इससे पहले श्रीलंका ने भारत की शौर्य एयरोनॉटिक्स और एक रूसी कंपनी के संयुक्त उद्यम को इसकी कमान सौंपने का फैसला किया था लेकिन श्रीलंका में सरकार बदलने के कारण वह सौदा पूरा नहीं हो सका।













