ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा एवं उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा है कि ऊर्जा सांख्यिकी 2026 के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता में भारत विश्व में तीसरे स्थान पर है। उन्होंने बताया कि भारत इस रैंकिंग में ब्राजील से आगे निकल गया है। अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी ने दिसंबर 2025 तक के आंकड़े जारी किए हैं।
यहां मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए जोशी ने कहा कि भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 55.3 गीगावाट की गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता वृद्धि हासिल की है।
प्रह्लाद जोशी ने यह भी बताया कि जुलाई 2025 में भारत ने विद्युत उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की अब तक की सबसे अधिक हिस्सेदारी हासिल कर ली है। नवीकरणीय ऊर्जा ने देश की कुल 203 गीगावाट बिजली मांग का 51.5 प्रतिशत पूरा किया। उन्होंने यह भी कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंन्धन स्रोतों से कुल 283.46 गीगावाट क्षमता स्थापित की जा चुकी है।
जोशी ने कहा कि 2025-26 (मार्च 2026 तक) के दौरान भारत का कुल विद्युत उत्पादन 1,845.921 बुशेल (बीयू) तक पहुंच गया। कुल उत्पादन में गैर-जीवाश्म ईंन्धन की हिस्सेदारी 2025-26 में 29.2 प्रतिशत (538.97 बुशेल) तक पहुंच गई। भारत ने पेरिस समझौते के लिए अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अंशदान (एनडीसी) के तहत निर्धारित 2030 के लक्ष्य से पांच साल पहले, जून 2025 में गैर-जीवाश्म ईंन्धन स्रोतों से अपनी संचयी विद्युत स्थापित क्षमता का 50 प्रतिशत हासिल कर लिया।

उन्होंने कहा कि सीओपी26 में माननीय प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय 2030 तक गैर-जीवाश्म स्रोतों से 500 गीगावाट स्थापित बिजली क्षमता प्राप्त करने की दिशा में काम कर रहा है।
अब तक तक देश में गैर-जीवाश्म ईंन्धन स्रोतों से कुल 283.46 गीगावाट क्षमता स्थापित की जा चुकी है। इसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा (150.26 गीगावाट सौर ऊर्जा, 56.09 गीगावाट पवन ऊर्जा, 11.75 गीगावाट जैव ऊर्जा, 5.17 गीगावाट लघु जल विद्युत, 51.41 गीगावाट वृहद जल विद्युत) और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता शामिल है।
2025-26 में गैर-जीवाश्म ऊर्जा उत्पादन क्षमता में 55.29 गीगावाट की वृद्धि हुई है, जो किसी भी वर्ष में हुई सबसे अधिक वृद्धि है। (इससे पहले सबसे अधिक वृद्धि 2024-25 के दौरान 29.5 गीगावाट थी)।
सौर ऊर्जा से प्राप्त नवीकरणीय ऊर्जा (डीआरई) इस वृद्धि का एक महत्वपूर्ण घटक बनकर उभरी है, जो 2025-26 के दौरान स्थापित 44.61 गीगावाट में से 16.3 गीगावाट (36 प्रतिशत) का योगदान देती है। इसमें पीएम कुसुम के तहत 7.6 गीगावाट और रूफटॉप सौर ऊर्जा से 8.7 गीगावाट शामिल है।
- 2025-26 के दौरान 6.05 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई, जो एक वर्ष में अब तक की सबसे अधिक क्षमता वृद्धि है। पिछले वर्ष पवन क्षमता वृद्धि 4.15 गीगावाट थी।
- नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) की स्थापित क्षमता 2014 से 3.59 गुना बढ़ गई है। यह मार्च 2014 में 76.38 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 में 274.68 गीगावाट हो गई, यानी 198.30 गीगावाट की वृद्धि हुई।
- सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 2014 से 53.28 गुना बढ़ गई है। यह मार्च 2014 में 2.82 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 में 150.26 गीगावाट हो गई, यानी 147.44 गीगावाट की वृद्धि हुई।
- पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 2014 से 2.66 गुना बढ़ गई है। यह मार्च 2014 में 21.04 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2026 में 56.09 गीगावाट हो गई, यानी 35.05 गीगावाट की वृद्धि हुई।
- पवन टरबाइन निर्माण क्षमता 2014 में 10 गीगावाट से बढ़कर 31.03.2026 तक लगभग 24 गीगावाट हो गई है।
- सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 2014 में 2.3 गीगावाट से बढ़कर 31.03.2026 तक लगभग 172 गीगावाट हो गई है।
वित्त वर्ष 2025-26 में, अनुमानित व्यय (बीई) 26,549.38 करोड़ रुपये और पुनर्भुगतान (आरई) 25,301.22 करोड़ रुपये के मुकाबले 24,176.68 करोड़ रुपये का व्यय हुआ है, जो बीई का लगभग 91.0 प्रतिशत और आरई का लगभग 95.5 प्रतिशत है।
वित्त वर्ष 2025-26 में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा कार्यान्वित की गई प्रमुख नीतियां-
नवीकरणीय ऊर्जा
उपकरणों और उनके निर्माण में उपयोग होने वाले पुर्जों पर जीएसटी की दर 22.09.2025 से 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई है। इससे घरेलू खरीदारों – परियोजना विकासकर्ताओं, डिस्कॉम, रूफटॉप सोलर इंस्टॉलर और कैप्टिव उपयोगकर्ताओं को सौर उपकरणों की लागत कम होने से लाभ होगा।
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए लिथियम-आयन सेल निर्माण हेतु पूंजीगत वस्तुओं पर बीसीडी छूट का विस्तार 2 फरवरी 2026 से 31 मार्च 2028 तक किया गया है। इससे मुख्य रूप से चीन से आयातित बैटरी पैकों पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा क्षेत्र में भारत के आत्मनिर्भर भारत लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी।
- अक्टूबर 2025 में लॉन्च किया गया नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण आयात निगरानी प्रणाली (आरईईआईएमएस) पोर्टल महत्वपूर्ण नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों के आयात पैटर्न की रियल-टाइम ट्रैकिंग सक्षम बनाता है। इससे आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता, नियामक अनुपालन और आयातित घटकों के दुरुपयोग की रोकथाम सुनिश्चित होती है।
- एमएनआरई की सिफारिश पर, एमओपी ने ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत आरसीओ अनुपालन ढांचे को संशोधित किया है। इससे अक्टूबर 2023 की पिछली अधिसूचना निरस्त हो गई है और राज्य-स्तरीय आरपीओ लक्ष्य एकीकृत आरसीओ ढांचे में समाहित हो गए हैं, जिससे विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत दोहरे दायित्व समाप्त हो गए हैं।
- 26 जून 2025 को जारी सीईआरसी (अंतर-राज्यीय पारेषण शुल्क और हानियों का बंटवारा) (चौथा संशोधन) विनियम, 2025 में नवीकरणीय ऊर्जा और बीईएसएस परियोजनाओं के लिए आईएसटीएस छूट की प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसमें अप्रत्याशित घटनाओं या नवीकरणीय ऊर्जा जनरेटर के नियंत्रण से बाहर के कारणों से होने वाली देरी की स्थिति में छूट के विस्तार का भी प्रावधान है।
- सीईआरसी (अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली के लिए कनेक्टिविटी और सामान्य नेटवर्क पहुंच) (तीसरा संशोधन) विनियम, 2025 के तहत गैर-सौर घंटे कनेक्टिविटी ढांचा लागू किया गया है, जिससे पारेषण नेटवर्क का बेहतर उपयोग संभव होगा।
- सीईआरसी ने वर्चुअल पावर परचेज एग्रीमेंट (वीपीपीए) के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। वीपीपीए नामित उपभोक्ताओं को अपने आरसीओ लक्ष्यों की पूर्ति के लिए एक अतिरिक्त विकल्प प्रदान करता है।
- एमएनआरई ने 500 मेगावाट क्षमता वाली नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अंतर-आधारित अनुबंध (सीएफडी) की पायलट योजना जारी की है। यह वैश्विक स्तर पर प्रमाणित सीसीएफडी तंत्र प्रतिस्पर्धी और बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण बनाए रखते हुए नवीकरणीय ऊर्जा डेवलपर्स को स्थिर राजस्व की गारंटी देता है।
भूतापीय ऊर्जा पर राष्ट्रीय नीति सितंबर 2025 में जारी की गई थी, जो देश भर में भूतापीय संसाधनों की खोज, विकास और वाणिज्यिक उपयोग में तेजी लाने के लिए एक व्यापक रणनीतिक ढांचा प्रदान करती है।
मंत्रालय ने मानव संसाधन विकास (एचआरडी) ढांचे के तहत जैव-ऊर्जा मित्र कार्यक्रम का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया है। इस रणनीतिक पहल का उद्देश्य बायोमास एग्रीगेटर्स, फीडस्टॉक डिपो ऑपरेटर्स और कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) तकनीशियनों सहित प्रमुख हितधारकों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण प्रदान करके नवीकरणीय ऊर्जा मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है।
मंत्रालय ने 27 जनवरी 2025 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से संशोधित सौर प्रणाली, उपकरण और घटक माल आदेश, 2025 (गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) 2025) जारी किया है। यह संशोधित आदेश पूर्ववर्ती क्यूसीओ, 2017 का स्थान लेता है और इसमें सौर पीवी मॉड्यूल, स्टोरेज बैटरी और एसपीवी इनवर्टर के लिए भारतीय मानकों के नवीनतम संस्करण शामिल हैं। यह आदेश एसपीवी मॉड्यूल की दक्षता निर्धारण के लिए मानक भी प्रदान करता है।
जीवाश्म ईंधन उत्पादन (71 प्रतिशत) • वर्ष 2025-26 के दौरान देश में जीवाश्म ईंधन स्रोतों से बिजली उत्पादन 1306.951 बुशेल रहा , जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 1363.069 बुशेल था, जो 4.12 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्शाता है।
- वर्ष 2025-26 के दौरान कोयला आधारित बिजली उत्पादन 1250.189 बुशेल रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 3.69 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर्शाता है।
- गैर-जीवाश्म (29 प्रतिशत) और आरई कुल ऊर्जा उत्पादन में गैर-जीवाश्म ईंधन से होने वाले उत्पादन की हिस्सेदारी लगभग 29.2 प्रतिशत रही है।
- 2025-26 के दौरान, कुल उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा (बड़े जलविद्युत संयंत्रों सहित) का हिस्सा 26.2 प्रतिशत रहा है।
- वर्ष 2025-26 के दौरान नवीकरणीय स्रोतों (बड़े जलविद्युत को छोड़कर) से उत्पादन 308.813 बुशेल रहा, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 255.009 बुशेल था, जो 21.10 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
- पवन ऊर्जा उत्पादन 106.089 बुशेल रहा, जो 27.29 प्रतिशत की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है।
ऊर्जा बदलाव की तैयारी में भारत आगे बढ़ा: डब्ल्यूईएफ
ऊर्जा रूपांतरण सूचकांक 2026 में स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क शीर्ष तीन स्थानों
पर बरकरार रहे, जबकि भारत दो स्थान ऊपर चढ़कर 70वें स्थान पर पहुंच गया
बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच वैश्विक ऊर्जा बदलाव की तैयारी में एक दशक से अधिक समय में पहली बार गिरावट आई है लेकिन भारत इस क्षेत्र में सबसे मजबूत सुधार दर्ज करने वाले देशों में शामिल है। विश्व आर्थिक मंच के सूचकांक में भारत दो स्थान ऊपर चढ़कर 70वें स्थान पर पहुंच गया है।
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के विगत दिवस जारी ऊर्जा रूपांतरण सूचकांक 2026 में स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क शीर्ष तीन स्थानों पर बरकरार रहे, जबकि भारत दो स्थान ऊपर चढ़कर 70वें स्थान पर पहुंच गया है।
भारत की स्थिति
रिपोर्ट के मुताबिक, ऊर्जा बदलाव के लिए तैयारी के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेज सुधार करने वाले देशों में शामिल रहा है। इसमें बुनियादी ढांचे में तेज वृद्धि, समानता, स्थिरता और वित्तीय निवेश में सुधार का योगदान रहा।
कम कार्बन उत्सर्जन वाली नौकरियां
रिपोर्ट कहती है कि भारत में 2024 में कम कार्बन उत्सर्जन वाली नौकरियों का हिस्सा 24 प्रतिशत बढ़ा। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार 2023 की तुलना में 25 प्रतिशत बढ़कर 13 लाख तक पहुंच गया जिसमें जलविद्युत सबसे बड़ा रोजगार स्रोत रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की स्वच्छ ऊर्जा रणनीति में नवीकरणीय क्षमता का विस्तार, बिजली ग्रिड का विस्तार और हरित हाइड्रोजन पर जोर प्रमुख कारक हैं।
ऊर्जा प्रणाली में चुनौतियां
यह रिपोर्ट कहती है कि ऊर्जा प्रणाली अधिक विखंडित एवं सुरक्षा केंद्रित होती जा रही है क्योंकि देश स्थिरता, किफायत और जुझारूपन के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उभरती अर्थव्यवस्थाओं ने ऊर्जा मांग में लगभग 80 प्रतिशत वृद्धि का योगदान दिया, लेकिन उन्हें ऊंची वित्तपोषण लागत एवं बुनियादी ढांचे की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारत की ऊर्जा बदलाव में कहा जा रहा है कि वह इस मामले में वैश्विक स्तर पर सबसे तेज सुधार करने वाले देशों में शामिल है।
भारत को ऊंची वित्तपोषण लागत एवं बुनियादी ढांचे की कमी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।












