ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। राजस्थान से सटी भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश की सुरक्षा को अभेद्य किला बनाने के लिए एक बहुत बड़ा रक्षात्मक और प्रशासनिक कदम उठाया गया है। सीमा पार से होने वाली नापाक हरकतों, नशीले पदार्थों की तस्करी और आधुनिक ड्रोन तकनीक के जरिए होने वाली घुसपैठ को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए गृह मंत्रालय के आदेश पर सुरक्षा का एक नया ब्लूप्रिंट तैयार कर धरातल पर लागू कर दिया गया है। इस नए मास्टर प्लान के तहत राजस्थान के 4 सीमावर्ती जिलों बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर को पूरी तरह से ‘स्पेशल वॉच जोन’ के रूप में चिन्हित किया गया है। अब सीमा सुरक्षा बल , जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस और केंद्रीय व राज्य की खुफिया सुरक्षा एजेंसियां एक संयुक्त कमांड के रूप में काम करेंगी। इस साझा प्रयास का मुख्य उद्देश्य बॉर्डर से सटे 50 किलोमीटर के पूरे दायरे में होने वाली हर गतिविधि को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।
राजस्थान की पश्चिमी सीमा पर स्थित पाकिस्तान की सीमा हमेशा से सामरिक रूप से अत्यंत संवेदनशील रही है। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए अब गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा को लेकर विशेष एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए हैं। नए ब्लूप्रिंट के अनुसार, अब सीमा सुरक्षा केवल बॉर्डर की चौकियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बॉर्डर के अंदरूनी 50 किलोमीटर के दायरे में एक विशेष सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है।
इस संयुक्त अभियान के तहत सभी संबंधित जिलों के जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, खुफिया विभाग के अधिकारी और बीएसएफ के आला अधिकारी नियमित रूप से बैठकें करेंगे और रणनीतिक इनपुट साझा करेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि अब सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक और सैन्य तालमेल पहले से कहीं अधिक मजबूत और त्वरित होने वाला है।
‘स्पेशल वॉच जोन’- 15 किमी के भीतर तुरंत एक्शन
इस नए सुरक्षा ब्लूप्रिंट का सबसे पहला और सीधा असर बॉर्डर के बिल्कुल नजदीक रहने वाले गांवों और ढाणियों पर दिखने लगा है। राजस्थान के 4 सीमावर्ती जिलों को ‘स्पेशल वॉच जोन’ में शामिल कर 15 किलोमीटर की सीमा के भीतर मौजूद सभी अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को तुरंत प्रभाव से हटाने की सख्त हिदायत दी गई है।
बाड़मेर जिले की ही बात करें तो यहां सीमा के सबसे नजदीक करीब 100 गांव स्थित हैं। इन गांवों में गुरुवार को प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा एक बड़ा संयुक्त अभियान चलाकर भौतिक सर्वे किया गया और संदिग्ध व बिना अनुमति के बने ढांचों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रशासन का साफ कहना है कि देश की सुरक्षा से जुड़े इस दायरे में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आईएसआई के पुराने तस्करी नेटवर्क पर वार
सुरक्षा एजेंसियों के पास लंबे समय से यह इनपुट रहे हैं कि भारत-पाक बॉर्डर से महज 5 से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भारतीय गांवों के समानांतर ही पाकिस्तान की सीमा के भीतर भी 5 और 10 किलोमीटर के दायरे में कई छोटे-छोटे गांव और ढाणियां मौजूद हैं। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई लंबे समय से इन सीमांत गांव-ढाणियों का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों और नापाक हरकतों को अंजाम देने के लिए करती रही है।













