ब्लिट्ज ब्यूरो
प्रयागराज। कुंभ नगरी में स्नान के लिए पहुंचे करोड़ों लोगों में 48,500 लोग अपने परिजनों से बिछड़े। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सबसे खास बात यह रही कि मेले में परिजनों से बिछड़ने वालों में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों की संख्या सबसे अधिक थी।
यह सभी कुछ दिनों के इंतजार के बाद अपने परिजनों तक पहुंच गए। सिर्फ छह साल का एक बच्चा ही ऐसा रहा, जो अब तक परिजनों तक नहीं पहुंच सका। कुंभ नगरी में परिजनों से बिछड़ने वालों की मदद के लिए तीन केंद्र काम कर रहे थे। इनमें एक सरकार की ओर से बना डिजिटल भूला-बिसरा केंद्र रहा जबकि दो स्वयंसेवी संगठनों ने संचालित किए। इनमें सबसे पुराना भारत सेवा केंद्र (1946) एवं हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति (1954) शामिल रहे। भूले-भटकों के लिए सबसे अधिक मददगार भारत सेवा केंद्र एवं हेमवती नंदन बहुगुणा समिति रहा। भारत सेवा केंद्र संचालक उमेश चंद्र तिवारी के मुताबिक 12 जनवरी से आरंभ हुए केंद्र में कुल 10,931 पुरुष एवं 8,100 महिलाएं एवं 17 बच्चे बिछड़े।
हेमवती नंदन बहुगुणा स्मृति समिति संचालक संत कुमार पांडेय के मुताबिक 10 जनवरी से 15 फरवरी के बीच 5500 महिलाओं एवं 24 बच्चों को उनके परिजनों से मिलाया। सिर्फ छह साल का बाबुल ही परिजनों तक नहीं पहुंच सका। उसे चाइल्ड लाइन में रखा गया है। वहीं, डिटिजल केंद्र के जरिये करीब 24 हजार लोग बिछुड़ने के बाद परिवार से मिले। यहां आने वालों में भी पुरुषों की संख्या अधिक रही।
आखिरी स्नान पर्व पर भी लोग बिछड़े-मिले
आखिरी स्नान पर्व के दौरान भी भूले-भटके केंद्र में अपनों से बिछड़ जाने वालों की भीड़ रही। 24 परगना, बंगाल से आए संजय महापात्रा की पत्नी खो गई ं। संजय ने कुछ देर तो उनको संगम घाट पर तलाशा लेकिन वह नहीं मिलीं। रोते-बिलखते संजय नंगे बदन ही भारत सेवा केंद्र पहुंचे। आंखों में आंसू भरकर संजय शिविर संचालकों से गुहार लगाने रहे। कई घंटे तक यहां शिविर के बाहर ही खड़े रहे। अलीगढ़ से आई चंदा का नौ साल का बेटा विशाल भी संगम में स्नान के बाद घाट पर ही गुम हो गया। इकलौते बेटे के लापता होते ही चंदा बदहवास हो उठीं। काफी देर तक वह उसे संगम के आसपास तलाशती रहीं। किसी तरह भटकती हुई यह भारत सेवा केंद्र पहुंची। यहां करीब तीन घंटे बाद पुलिस वालों ने उद्घोषणा सुनकर बच्चे को यहां पहुंचाया। बच्चे को देखते ही माँ चंदा ने उसे सीने से लगा लिया। इसी तरह पूरे दिन ही यहां बिछड़ने और मिलने वालों का तांता लगा रहा।













