ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।कभी नक्सली हिंसा और खूनी हमलों के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा एलान करते हुए कहा है कि भारत अब ‘नक्सल मुक्त’ हो चुका है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित कार्यक्रम में शाह ने कहा कि दशकों तक लाल आतंक की छाया में जीने वाला यह इलाका अब विकास और शांति की नई पहचान बनने जा रहा है।
बस्तर में विद्रोह के लंबे इतिहास का जिक्र करते हुए, गृह मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहां बाकी भारत को 1947 में आजादी मिल गई थी, वहीं बस्तर ने सच्ची आजादी का अनुभव 31 मार्च, 2026 के बाद ही किया। शाह ने कहा, ‘6 दशकों से भी ज्यादा समय तक, इस क्षेत्र को गंभीर आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक झटके झेलने पड़े हैं।’ 6 अप्रैल 2010 को बस्तर में हुए देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे। यह घटना बस्तर को नक्सल हिंसा के सबसे खतरनाक केंद्र के रूप में स्थापित कर गई थी। पिछले दो दशकों में करीब 1300 सुरक्षाकर्मियों और 1800 से ज्यादा नागरिकों की जान नक्सली हिंसा में गई। लंबे समय तक यहां शाम ढलने के बाद घर से निकलना भी खतरे से खाली नहीं माना जाता था।
‘नक्सल मुक्त भारत’ मिशन
गृह मंत्री ने कहा कि 2019 के बाद से केंद्र सरकार ने ‘नक्सल मुक्त भारत’ का लक्ष्य तय किया था और 2023 में छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार बनने के बाद अभियान और तेज हुआ। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2024 में 224 नक्सली मारे गए, जबकि 2025 में यह संख्या करीब 400 तक पहुंच गई। पिछले 10 वर्षों में 10 हजार से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया है।
सुरक्षा कैंप अब बनेंगे जन सेवा केंद्र
अमित शाह ने बस्तर के लिए नई विकास योजना का भी एलान किया। उन्होंने कहा कि अब सुरक्षा बलों के कैंपों को ‘जन सेवा केंद्र’ में बदला जाएगा, जहां बैंकिंग, आधार कार्ड, सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं जैसी सुविधाएं मिलेंगी। सरकार अब बस्तर को सिर्फ सुरक्षा मॉडल नहीं, बल्कि विकास मॉडल के रूप में पेश करना चाहती है।
सड़क, इंटरनेट और निवेश पर फोकस
नक्सलवाद खत्म होने के बाद बस्तर में निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। पिछले कुछ वर्षों में यहां सड़कें, मोबाइल कनेक्टिविटी, बैंकिंग सेवाएं, स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। केंद्र सरकार अब बस्तर की पहचान को डर और हिंसा से हटाकर विकास और अवसरों से जोड़ना चाहती है। बस्तर में केंद्रीय गृह मंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में हुई केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की बैठक को भी बड़ा प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है।













