ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक महिला सैन्य अधिकारी को स्थायी कमीशन देने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस महिला सैन्य अधिकारी को स्थायी कमीशन देने पर विचार नहीं किया गया, जबकि अन्य समान पद वाले अधिकारियों को इसका लाभ दिया गया। कोर्ट ने कहा कि जो एक के लिए अच्छा है, वह सभी के लिए अच्छा होगा। किसी को हां और किसी को न, ऐसा नहीं होना चाहिए। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ लेफ्टिनेंट कर्नल सुप्रिता चंदेल की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) के फैसले को चुनौती दी थी, जिसने स्थायी कमीशन के लिए उनके मामले पर विचार नहीं किया था। लेफ्टिनेंट कर्नल चंदेल ने 2008 में सेना के डेंटल कोर में शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त किया था।
समान स्थिति वाले अन्य लोगों को भी मिले लाभ
पीठ ने कहा कि जब सरकारी विभाग के रवैये से पीड़ित कोई नागरिक न्यायालय आता है और पक्ष में आदेश पाता है, तो समान स्थिति वाले अन्य लोगों को न्यायालय गए बिना लाभ दिया जाना चाहिए। अधिकारियों को स्वयं ही अपीलकर्ता को एएफटी, प्रधान पीठ के 2013 के फैसले का लाभ देना चाहिए था। 14 जनवरी, 2019 को सेना प्रमुख की ओर से उन्हें प्रशस्ति पत्र भी मिला है, लेकिन महिला सैन्य अधिकारी के साथ इसी तरह की स्थिति वाले अधिकारियों के मुकाबले भेदभाव किया गया।













