ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। देश में पहली जुलाई से लागू हुए तीन परिवर्तनकारी नए आपराधिक कानूनों – ‘भारतीय न्याय संहिता’, ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ और ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम’ के सख्त प्रावधानों से अब ‘उद्घोषित अपराधी’ बच नहीं सकेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा तीनों नए कानूनों के सफल क्रियान्वयन को लेकर आयोजित एक लाइव प्रदर्शनी में डीजीपी एसएस यादव ने बताया कि उद्घोषित अपराधी, कानूनी प्रक्रिया में अपनी अनुपस्थिति का फायदा नहीं उठा सकेंगे। आतंकवादी हो, गैंगस्टर हो या कोई आर्थिक अपराध का आरोपी, जो दूसरे मुल्कों में जाकर छिप गए हैं, वे लंबे समय तक कानून के शिकंजे से बच नहीं सकेंगे। उनकी गैर मौजूदगी में ही ट्रायल चलेगा। जब कभी वे भारत आएंगे तो उनके मामले में फैसला सुना दिया जाएगा। दोष सिद्ध होने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। संभव है कि कई सारे मामलों में उद्घोषित अपराधी, भारत लौटते ही सीधे सलाखों के पीछे पहुंच जाएं।
बिना आरोपी के ट्रायल शुरु नहीं हो पाता था
चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरजीत कौर ने बताया, पुराने कानूनों में यह व्यवस्था थी कि बिना आरोपी के ट्रायल शुरु नहीं हो पाता था। इससे मामला बहुत लंबा खिंच जाता था। आरोपी के पकड़े जाने पर ही ट्रायल प्रारंभ किए जाने का प्रावधान था। कई आरोपी, इसका भरपूर फायदा उठाते थे। वर्षों तक केस ठंडे बस्ते में पड़ा रहता था। अब ऐसा नहीं होगा। नए कानूनों के तहत जब कभी आरोपी पकड़ा जाएगा, तो उसे केवल सजा सुनाई जाएगी, क्यों उसके केस का ट्रायल तो पहले हो चुका है। हालांकि उसके पास अपील करने का अधिकार रहेगा। एसएसपी कंवरजीत कौर के मुताबिक, चंडीगढ़ में 30 कोर्ट हैं। अभी दो अदालतों को पूर्ण तरीके से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग न्याय श्रुति सुविधा से युक्त बनाया गया है। यानी इन अदालतों में पूरी कार्यवाही डिजिटल तरीके से संपन्न हो रही है।
अदालत का ई प्लेटफार्म
अदालत के ई प्लेटफार्म पर जांच अधिकारी, वकील, डॉक्टर, फोरेंसिक लैब एक्सपर्ट और गवाह भी जुड़ सकते हैं। केस के निपटारे में ज्यादा समय न लगे, इसके लिए प्रावधान किया गया है कि वकील, एक दिन में दो से ज्यादा एडजर्नमेंट न लें। डीजीपी यादव के मुताबिक, गंभीर अपराधों के फरार आरोपी को ‘उद्घोषित अपराधी’ बनाया जाएगा। आरोपी की अनुपस्थिति में भी गवाहों व साक्ष्यों का परीक्षण होगा। उसकी गैर मौजूदगी में ही निर्णय की घोषणा कर दी जाएगी। सार्वजनिक नोटिस और अखबारों के माध्यम से सूचना देने का प्रावधान रहेगा। इस प्रक्रिया के जरिए अंतरराष्ट्रीय अपराधियों पर कार्रवाई संभव हो सकेगी।
गवाहों को शारीरिक और मानसिक सुरक्षा
नए कानूनों में गवाहों को शारीरिक और मानसिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी। गवाह की पहचान और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता रखी जाएगी। स्थान परिवर्तन और पहचान बदलने की व्यवस्था रहेगी। मानसिक तनाव व आघात से बचाने के लिए काउंसलिंग होगी। साक्ष्य की सत्यता सुनिश्चित होगी।













