ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। इजरायल और अमेरिका के अटैक में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद एक सवाल लंबे समय से उठाया जा रहा था। सवाल ये कि भारत ने बिना उकसावे वाले इस हमले की अब तक निंदा क्यों नहीं की। कई विपक्षी पार्टियां खुलकर भारत सरकार से सवाल कर रही थीं कि ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या की निंदा खुलेमंच पर क्यों नहीं की गई।
इस बीच भारत सरकार ने पहली बार आधिकारिक तौर पर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या की निंदा की है। सरकार की तरफ से बाकायदा ईरान के दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए गए हैं। भारत सरकार के इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि अब तक मोदी सरकार ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी थी। आज दिल्ली में स्थित ईरान के दूतावास पर भारत सरकार की तरफ से विदेश सचिव विक्रम मिस्री पहुंचे। उन्होंने दूतावास में शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और ईरान के मारे गए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के प्रति संवेदना व्यक्त की।
खाड़ी देशों पर अंधाधुंध बरसाईं मिसाइलें
बता दें कि इजरायल और अमेरिका ने अचानक ही ईरान पर अटैक कर दिया। मिसाइलों के आक्रमण से ईरान की राजधानी तेहरान शहर थर्रा गया। इजरायल ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के घर को भी निशाना बनाया, जिसमें खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्यों की मौत हो गई। इस हमले के बाद से ईरान बौखला गया है और उसने खाड़ी देशों पर अंधाधुंध मिसाइल बरसानी शुरू कर दी हैं।
ईरान ने बंद किया सबसे बड़ा व्यापार मार्ग
हमले से बौखलाए ईरान ने पहले तो खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिका के सैन्य ठिकानों को ही निशाना बनाया, लेकिन बाद में कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए आम लोगों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों पर भी हमले शुरू कर दिए। सऊदी अरब, बहरीन, यूएई, कतर, कुवैत सहित कई देशों को ईरान की तरफ से निशाना बनाया गया। ईरान ने इस समय तेल सप्लाई रूट के सबसे बड़े मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद कर रखा है।













