ब्लिट्ज ब्यूरो
मुंबई। मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली बृहन्मुंबई इलेक्टि्रक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (बेस्ट) को इस साल भी बीएमसी बजट से कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। बीएमसी ने इस बजट में घाटे में चल रही बेस्ट के लिए सिर्फ 1000 करोड़ रुपये का ही प्रावधान किया है। इसे लेकर सवाल उठ रहे है कि क्या इतनी राशि से बेस्ट अपनी आर्थिक हालात और परिचालन की समस्याओं का समाधान कर सकेगी। हालांकि बीएमसी का कहना है कि वे वर्ष 2012-13 से हर साल बेस्ट को औसतन 1000 करोड़ रुपये की सहायता दे रहे है। इसी कड़ी में जनवरी, 2026 तक कुल 12,028.81 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद दी जा चुकी है। हालांकि, बेस्ट का घाटा हर साल बढ़ता जा रहा है। बसों के रखरखाव, ईंन्धन खर्च, कर्मचारियों के वेतन और नई बसों की खरीद के लिए यह राशि काफी नहीं होगी।
बेस्ट आज कई गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। बसों की संख्या लगातार घट रही है, जिससे यात्रियों को बस में भीड़ और बस पकड़ने ले लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। कई रूट्स पर बसों की फ्रीक्वेंसी कम हो गई है। कई बसों में बार-बार खराबी की शिकायतें सामने आती है। वहीं, इलेक्टि्रक बसों के विस्तार की योजना भी कछुए की चाल चल रही है। कर्मचारियों की कमी और ओवरटाइम का बोझ भी संस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हालांकि, इस साल के बजट में भी सामाजिक योजनाएं जारी रखी गई है। स्कूलों में पहली से दसवीं तक पढ़ने वाले बच्चों के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा, वरिष्ठ नागरिकों को किराये में 50% छूट और दिव्यांग यात्रियों के लिए 100% मुफ्त यात्रा की योजना जारी रहेगी।













