ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। मेघालय की राजधानी शिलांग में आयोजित नॉर्थ ईस्ट इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर समिट एंड एग्जीबिशन 2026 का समापन हो गया। दो दिवसीय इस सम्मेलन में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों, उद्यमियों और बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में पूर्वोत्तर भारत के विकास, निवेश और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसका आयोजन बिल्ड इंडिया द्वारा कराया गया। समापन समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
मुख्य अतिथि ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत को कनेक्टिविटी, व्यापार, पर्यटन और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से अब तक इस क्षेत्र में सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे, जलमार्ग, डिजिटल नेटवर्क और ऊर्जा परियोजनाओं पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। शेखावत ने कहा कि बुनियादी ढांचे का विकास केवल सड़क और पुल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों को अवसरों, सेवाओं और बाजारों से जोड़ना भी है। उन्होंने पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत का प्रवेश द्वार बताते हुए इसके पर्यटन और निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया।
सम्मेलन के दूसरे दिन पर्यटन, औद्योगिक विकास, हरित ऊर्जा, बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और स्टार्टअप्स पर कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए. टिपरा मोथा के अध्यक्ष प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देब बर्मन ने कहा कि पर्यटन का लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुंचना चाहिए. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को बचाए रखते हुए विकास पर जोर दिया।
मेघालय के मुख्य सचिव डॉ. शकील पी. अहमद ने कहा कि पूर्वोत्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार तथा उद्यमिता के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने आतिथ्य, नर्सिंग और देखभाल सेवाओं से जुड़े प्रशिक्षण केंद्रों में निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई।













