ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के चलते इस साल पहाड़ों में बर्फबारी घटी है। इससे पहाड़ी राज्यों में पर्यटन और खेती पर भी असर पड़ा है। साल दर साल घटती बर्फबारी और बढ़ती गर्मी से पहाड़ों पर जमी बर्फ में भी कमी आ रही है।
हाल के एक अध्ययन में सामने आया है कि हिमालय की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट के ऊपरी हिस्से में हिम आवरण 150 मीटर तक घट गया है। सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों के जरिए किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने तेजी से घटते ग्लेशियरों को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लगातार बढ़ते तापमान और बर्फबारी में कमी से हिमालय के इस क्षेत्र में ग्लेशियर का पिघलना तेज हो सकता है। इससे हिमालय के बर्फ भंडारों पर निर्भर जल संसाधन और पारिस्थितिकी तंत्र पर असर पड़ सकता है।
पहाड़ों में घटती बर्फबारी निश्चित रूप से मुश्किलें बढ़ाएगी, फसलों के साथ ही पेयजल का भी संकट बढ़ेगा।
जलवायु परिवर्तन के खतरे से बचने और कृषि उत्पादकता बनाए रखने के लिए सरकार ने तैयारी की है। ब्लॉक स्तर पर रणनीति बनाई जा रही है।
प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन में भले ही हम दुनिया से बेहतर हैं लेकिन जलवायु परिवर्तन को लेकर बड़े पैमाने पर तैयारी की जरूरत महसूस की जा रही है।
जलवायु परिवर्तन के चलते जंगलों में आग के मामले बढ़े हैं, कम बारिश और बढ़ती गर्मी से खतरा लगातार बढ़ रहा है।














