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मोदी के आह्वान के बाद बि्रक्स में होगा बदलाव

भरोसेमंद एआई के लिए वैश्विक नियम बनें

by Blitz India Media
October 25, 2024
in Hindi Edition
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modi
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ब्लिट्ज ब्यूरो

पीएम ने कजान में फिर दिया ‘युद्ध नहीं बुद्ध’ वाला संदेश
नई दिल्ली। रूस के कजान शहर में हुए 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक चुनौतियों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हमारी बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया आज युद्धों, संघर्षों, आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन एवं आतंकवाद जैसी कई चुनौतियों से घिरी हुई है। दुनिया में उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम विभाजन की बात हो रही है और प्रौद्योगिकी के युग में, साइबर सुरक्षा, डीप फेक, दुष्प्रचार जैसी नई चुनौतियां सामने आई हुई हैं। शिखर सम्मेलन का पूर्ण सत्र कजान एक्सपो सेंटर में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में चीन, भारत, यूएई जैसे कई बड़े देशों ने हिस्सा लिया।

पीएम मोदी का खास मुद्दे पर जोर
पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स को इन सभी चुनौतियों का सामना करने में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को एक ऐसे समूह के रूप में देखा जाना चाहिए जो जनहित में काम करता है, न कि विभाजनकारी ताकत के रूप में। हम ऐसी स्थिति में हैं जहां ब्रिक्स से कई उम्मीदें हैं। मेरा मानना है कि एक विविध और समावेशी मंच के रूप में ब्रिक्स सभी मुद्दों पर सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। हमारा दृष्टिकोण जन-केंद्रित रहना चाहिए। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने शांति और कूटनीति के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों को एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत युद्ध नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है। हमने मिलकर कोविड जैसी चुनौती को हराया, उसी तरह हम आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित, मजबूत और समृद्ध भविष्य के लिए नए अवसर पैदा करने में पूरी तरह सक्षम हैं। इसी तरह, हमें साइबर सुरक्षा, सुरक्षित और भरोसेमंद एआई के लिए वैश्विक नियमों के लिए काम करना चाहिए।

13 नए ब्रिक्स पार्टनर देशों का स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ब्रिक्स भागीदार देश के रूप में नए देशों का स्वागत करने के लिए तैयार है लेकिन यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाएं और ब्रिक्स संस्थापक सदस्यों के विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए। पीएम मोदी ने सम्मेलन के दौरान 13 नए ब्रिक्स पार्टनर देशों का स्वागत किया।

– ब्रिक्स विभाजनकारी नहीं बल्कि जनहित समूह बने
– दुनिया युद्धों, संघर्षों, आर्थिक, जलवायु, आतंकवाद जैसी चुनौतियों से घिरी
– आतंकवाद पर दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं
– ब्रिक्स देश सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के लिए करें काम
– भारत की एक बड़ी सफलता की कहानी है यूपीआई
– ब्रिक्स स्टार्टअप फोरम की घोषणा, इस साल होगा लॉन्च

वैश्विक संस्थाओं में समयबद्ध सुधार जरूरी
पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, बहुपक्षीय विकास बैंकों और विश्व व्यापार संगठन जैसी वैश्विक संस्थाओं में सुधार का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का उद्देश्य इन संस्थानों को बदलना नहीं बल्कि उन्हें और अधिक समावेशी और प्रभावी बनाना है। मोदी ने कहा कि हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, बहुपक्षीय विकास बैंकों, विश्व व्यापार संगठन जैसे वैश्विक संस्थानों में सुधार के लिए समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ना चाहिए। ब्रिक्स के प्रयासों को आगे बढ़ाते समय, हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि इस संगठन की छवि ऐसी न हो कि हम वैश्विक संस्थानों में सुधार नहीं करना चाहते बल्कि उन्हें बदलना चाहते हैं।

आतंकवाद से निपटने के लिए एकजुट होना होगा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आतंकवाद और आतंक के वित्तपोषण से निपटने के लिए हमें एकजुट होना होगा और दृढ़ता से सहयोग करना होगा। ऐसे गंभीर मुद्दे पर दोहरे मापदंड के लिए कोई जगह नहीं है। हमें अपने देशों के युवाओं में चरमपंथी विचारों को रोकने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाने चाहिए। हमें संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के लंबित मुद्दों पर भी मिलकर काम करना होगा।

मोदी का ब्रिक्स देशों के बीच वित्तीय एकीकरण पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ब्रिक्स देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर दिया जा रहा है। भारत में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को तेजी से बढ़ाने के लिए हमने गति शक्ति पोर्टल बनाया है। इससे विकास की योजनाओं को एकीकृत करने और उनके क्रियान्वयन में मदद मिली है और लॉजिस्टिक्स लागत कम हो गई है। हमें अपने अनुभव आप सभी के साथ साझा करने में खुशी होगी। हम ब्रिक्स देशों के बीच वित्तीय एकीकरण बढ़ाने के प्रयासों का स्वागत करते हैं। स्थानीय मुद्रा में व्यापार और आसान सीमा पार भुगतान से हमारा आर्थिक सहयोग मजबूत होगा। भारत द्वारा बनाया गया यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) भारत की एक बड़ी सफलता की कहानी है। इसे कई देशों में अपनाया गया है। पिछले साल, हमने इसे यूएई के शेख मोहम्मद के साथ मिलकर लॉन्च किया। इस क्षेत्र में अन्य देशों के साथ भी सहयोग किया जा सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि नए स्वरूप में ब्रिक्स 60 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक की अर्थव्यवस्था है। अपने नए स्वरूप में ब्रिक्स विश्व की 40 प्रतिशत मानवता और लगभग 30 प्रतिशत अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है। पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। हमारे आर्थिक सहयोग को बढ़ाने में ब्रिक्स व्यापार परिषद और ब्रिक्स महिला व्यापार गठबंधन की सबसे बड़ी भूमिका रही है।

ब्रिक्स वैक्सीन शोध एवं विकास केंद्र ने देशों की स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ाया
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2022 में लॉन्च किया गया ब्रिक्स वैक्सीन शोध एवं विकास (आर एंड डी) केंद्र भी देशों की स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ाने में मदद कर रहा है। हमें ब्रिक्स भागीदारों के साथ डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत के सफल अनुभव को साझा करने में खुशी होगी।

जलवायु परिवर्तन हमारी साझी प्राथमिकता का विषय
पीएम मोदी ने कहा, जलवायु परिवर्तन हमारी साझी प्राथमिकता का विषय रहा है। रूस की मेजबानी में ब्रिक्स खुले कार्बन बाजार साझेदारी के लिए बनी सहमति का ब्रिक्स स्वागत करता है। भारत में भी हरित विकास, जलवायु के अनुकूल बुनियादी ढांचे पर जोर दिया जा रहा है। भारत में भी अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, जलवायु-स्थायी संरचना के लिए गठबंधन और एक पेड़ मां के नाम जैसी पहलों को शुरू किया गया है। पिछले साल कॉप 28 के दौरान हमने ग्रीन क्रेडिट जैसी महत्वपूर्ण पहल शुरू की थी। मैं ब्रिक्स भागीदारों को इन पहलों में शामिल होने का आमंत्रण देता हूं।

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स समूह से विश्व शासन सुधारों में अधिक सक्रियता से कदम उठाने की अपील की। उन्होंने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भारत द्वारा आयोजित वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन को याद करते हुए कहा कि ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ की चिंताओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। पीएम ने कहा कि भारत के ‘गिफ्ट सिटी’ समेत न्यू डेवलपमेंट बैंक की क्षेत्रीय उपस्थिति ने नई वैल्यू और प्रभावों को पैदा किया है। इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाने के लिए ब्रिक्स की एक्टिविटी पर जोर डालते हुए उन्होंने कहा कि एग्रीकल्चर में व्यापार सुविधा, लचीली सप्लाई चेन, ई-कॉमर्स और विशेष आर्थिक क्षेत्रों पर जोर दिया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने लघु और मध्यम उद्योगों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया और ब्रिक्स स्टार्टअप फोरम की घोषणा की, जिसे इस साल लॉन्च किया जाना है। मोदी ने न्यू डेवलपमेंट बैंक की अध्यक्ष डिल्मा रूसेफ को बधाई दी और कहा पिछले 10 वर्षों में यह बैंक ग्लोबल साउथ के देशों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहा है।

कजान घोषणा पत्र को दी मंजूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलतापूर्वक मेजबानी करने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को बधाई दी और ग्रुप की अध्यक्षता संभालने पर ब्राजील को शुभकामनाएं दीं। वहीं, शिखर सम्मेलन के समापन पर ब्रिक्स देश के नेताओं ने कजान घोषणा पत्र को अपनाते हुए मंजूरी दी।

जगह हो तो अलग से हाईलाइट करें नहीं तो शेष में मोटे बोल्ड अक्षरों में बाक्स बना दें…
पीएम मोदी ने कहा कि नए स्वरूप में ब्रिक्स 60 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक की अर्थव्यवस्था है। अपने नए स्वरूप में ब्रिक्स विश्व की 40 प्रतिशत मानवता और लगभग 30 प्रतिशत अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है। पिछले दो दशकों में ब्रिक्स ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं।

ब्रिक्स का विस्तार भारत के लिए अहम
ब्रिक्स ग्रुप की शुरुआत चार देशों के साथ हुई थी। इसके बाद इसमें दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ और इस साल फिर से इसका विस्तार हुआ है। रूस में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पांच नए सदस्य देशों के शामिल होने के बाद सदस्यों की संख्या दोगुनी हो गई है। उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह ब्रिक्स में अब दो अफ्रीकी देश- मिस्र और इथियोपिया के अलावा ईरान और यूएई भी आ गए हैं। 55 सदस्यीय अफ्रीकी संघ में दो और देशों का शामिल होना भारत के लिए महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स का भारत शुरुआती और अहम सदस्य है। ऐसे में इस समूह का विस्तार उसके लिए खास मायने रखता है।
सभी अफ्रीकी देशों के साथ भारत का व्यापारिक संबंध काफी बढ़ा हुआ है। निवेश भी निरंतर बढ़ रहा है। भारत एक ऐसा देश है जिसे ऊर्जा की जरूरत है और उसे इसके वैकल्पिक स्रोतों की तलाश भी है। ऐसे में ब्रिक्स का विस्तार उसके लिए अहम बन जाता है।

इथियोपिया और मिस्र की अहमियत
ब्रिक्स के विस्तार के बाद अब इसमें अफ्रीकी महाद्वीप के देश शामिल हो गए हैं। इथियोपिया, अफ्रीका में भारत का रणनीतिक साझीदार है। भारत के इथियोपिया से घनिष्ठ संबंध हैं। मिस्र भी भारत का रणनीतिक साझीदार है। अफ्रीकी महाद्वीप को किसी भी बहुपक्षीय संस्था में प्रतिनिधित्व का हिस्सा नहीं मिला है। ऐसे में अफ्रीकी देश ब्रिक्स को एक ऐसे मंच के रूप में देखते हैं जहां उन्हें उन मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने का मौका मिलेगा जिन पर वे लंबे समय से दुनिया में हाशिए पर थे।

इस समय कम से कम 34 देश हैं, जिन्होंने ब्रिक्स में शामिल होने में रुचि व्यक्त की है। उन्हें लगता है कि ब्रिक्स वास्तव में वैश्विक दक्षिण का प्रतिनिधि है और यह वैश्विक दक्षिण की आवाज बनेगा।

ब्रिक्स में बड़े आकार के देशों की एंट्री
ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के गठन को प्रभावित करने के लिए एक बहुत बड़ा दबाव समूह साबित हो सकता है। सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने वाला देश विश्व में राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था का संरक्षक बन जाता है। इसलिए भारत को इसकी सदस्यता की आवश्यकता है। इसी तरह ऊर्जा के मामले में यूएई एक बहुत बड़ा देश है क्योंकि संसाधन के लिहाज से तेल बहुत महत्वपूर्ण है। ब्रिक्स में बड़े देशों के शामिल होने का अर्थ यह है कि यह मंच दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करेगा। ब्रिक्स दुनिया की 41 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है जिसका विश्व जीडीपी में 24 फीसदी और विश्व व्यापार में 16 प्रतिशत हिस्सा है।

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