ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से पूछा है कि क्या सैकड़ों अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को उनके मूल देश भेजने के बजाय उन्हें अनिश्चित काल के लिए भारत के हिरासत केन्द्रों में रखा जा सकता है।
जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने कहा कि यदि बांग्लादेश से आया कोई अवैध प्रवासी विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत पकड़ा जाता है और दोषी ठहराया जाता है, तो उन्हें सजा की अवधि पूरी होने के बाद तुरंत उनके मूल देश भेज दिया जाना चाहिए। पीठ ने आश्चर्य जताया कि क्या उन्हें भारत में हिरासत केंद्रों/सुधार गृहों में अनिश्चित काल के लिए रखा जाना चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि सुधार गृहों में करीब 850 अवैध प्रवासी बंद हैं और उसने ठीक-ठीक वर्तमान संख्या जाननी चाही।
खंडपीठ ने संघ से पूछा, ”विदेशी अधिनियम के तहत दोषी ठहराए जाने और पूरी सजा काट लेने के बाद आज की तारीख में कितने अवैध प्रवासी विभिन्न हिरासत शिविरों/सुधार गृहों में हैं?”
खंडपीठ ने कहा, ”हम प्रतिवादियों से यह समझना चाहेंगे कि एक बार बांग्लादेश के अवैध प्रवासी को कथित अपराध के लिए दोषी ठहराया गया तो क्या यह स्थापित नहीं हो जाता कि वह भारत का नागरिक नहीं है। ऐसे सैकड़ों अवैध प्रवासियों को अनिश्चित काल के लिए हिरासत शिविरों/सुधार गृहों में रखने का क्या अर्थ है?’













