ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना अपने लड़ाकू विमानों, खासकर सुखोई को घातक लॉन्ग रेंज ग्लाइड बम (एलआरजीबी) से लैस करेगी। इन बमों का निर्माण डीआरडीओ की मदद से देश में ही किया जा रहा है। इन बम से बंकरों तथा उन मजबूत ढांचों को भी ध्वस्त करना संभव हो सकेगा, जो आमतौर पर मिसाइलों के हमलों में नष्ट नहीं हो पाते हैं।
– 60 तक सटीक हमला करने में सक्षम
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, वायुसेना के विमानों को एलआरजीबी से लैस करने के लिए पहले चरण में 300 बम के ऑर्डर दिए गए हैं। इन बमों को डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित रक्षा प्रयोगशाला ने तैयार किया है। पिछले साल अगस्त में पहली बार इसका सफल परीक्षण किया गया था। करीब एक हजार किलोग्राम वजन का एलआरजीबी 60 किमी दूर तक सटीक हमला करने में सक्षम है। उसके बाद कई और परीक्षण एलआरजीबी के हो चुके हैं। बमों को सुखोई एमके-1 से दागा गया।
सूत्रों का कहना है कि पहले चरण में सभी सुखोई विमानों को इन बमों से लैस किया जाएगा। लड़ाकू विमान से जब बम बरसाए जाते हैं तो उसे लक्ष्य के ऊपर उड़ान भरनी होती है। लेकिन ग्लाइड बम के मामले में ऐसी बाध्यता नहीं है तथा इसे दूर से भी दागा जा सकता है। वायुसेना को इनके हासिल होने से उसकी ताकत में भारी इजाफा होगा।













