ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट समेत कुछ उच्च न्यायालयों में मामलों को सूचीबद्ध करने को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कड़ी टिप्पणी की है। शीर्ष कोर्ट ने कहा, उच्च न्यायालयों, खासकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामले सूचीबद्ध करने की व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास की जमीन संबंधी मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा, हम टिप्पणी नहीं करना चाहते।
कुछ हाईकोर्ट के बारे में हमें नहीं पता कि सुनवाई के मामले में वहां क्या होगा। यह (इलाहाबाद) एक ऐसा हाईकोर्ट है, जिसके बारे में वास्तव में चिंता होनी चाहिए। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा, मैं भी टिप्पणी नहीं करना चाहता। यह बेहद चिंताजनक है। अंसारी के वकील सिब्बल ने कहा, अंसारी का बंगला ढहाने के बाद उस जमीन पर यूपी सरकार गरीबों के लिए फ्लैट बनाने की योजना ला रही है और इस बारे में शीर्ष कोर्ट के आदेश के बावजूद इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो रही। मामले को कई बार सूचीबद्ध किया गया, लेकिन कोई अंतरिम आदेश नहीं मिल सका।
न्यायाधीशों व रजिस्ट्रार संग की लंबी बातचीत
जस्टिस सूर्यकांत ने हाईकोर्ट में लिस्टिंग से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया। कहा, दुर्भाग्य से फाइलिंग व्यवस्था और लिस्टिंग ध्वस्त हो गई है। कोई नहीं जानता कि कौन सा मामला कब सूचीबद्ध होगा।
मैं पिछले शनिवार को वहां था, न्यायाधीशों व रजिस्ट्रार के साथ लंबी बातचीत की थी। सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई मौकों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अरसे से लंबित आपराधिक अपीलों पर चिंता जता चुका है।












