ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। फ्रांस से हुए 114 राफेल मल्टीरोल लड़ाकू विमानों के नवीनतम सौदे के अंतर्गत आने वाले विमान अगस्त 2029 तक वायुसेना को मिलने शुरू होंगे। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि मेक इन इंडिया के तहत राफेल को फ्रांस के बाहर भारत में पहली बार बनाया जाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस सौदे को मंजूरी प्रदान की थी। रक्षा सचिव ने कहा कि विमान के 40 से 50 फीसदी हिस्से का स्थानीयकरण (लोकलाइजेशन) किया जाएगा, जिससे देश में रक्षा उत्पादन क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। यह कार्यक्रम सरकार से सरकार (जीटूजी) समझौते के तहत लागू किया जा रहा है, जिसमें कोई मध्यस्थ नहीं होंगे और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाएगी। सिंह ने यह भी बताया कि इस सौदे के तहत भारतीय हथियार और सिस्टम विमान में पूरी तरह लगाए जा सकेंगे।
2028 से आने शुरू होंगे नौसेना के लिए राफेल मरीन
रक्षा सचिव ने बताया कि नौसेना के लिए राफेल मरीन विमान 2028 से आने शुरू हो जाएंगे, जबकि वायुसेना के लिए लगभग साढ़े तीन साल बाद आने शुरू होंगे। इससे वायुसेना की घटती स्क्वॉड्रन संख्या से निपटने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि नौसेना के लिए पिछले साल 26 राफेल मरीन विमानों का सौदा अलग से किया गया था।
18 फ्रांस और 96 भारत में बनेंगे
फ्रांस राफेल की एक स्क्वॉड्रन (लगभग 18 विमान) सीधे भारत भेजेगा जबकि शेष 96 विमान भारत में बनाए जाएंगे। भारत में राफेल के पुर्जी के निर्माण के लिए आधारभूत ढांचा पहले से ही तैयार हो रहा है। हैदराबाद स्थित टाटा एडवांन्स्ड सिस्टम्स लि. और राफेल की निर्माता दसो एविएशन की इकाई राफेल के हिस्से बना रही है। साल 2028 तक इसकी क्षमता बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा विमानों की फाइनल असेंबली लाइन नागपुर में स्थापित किए जाने की संभावना है।
एलसीए मार्क 1ए : पांच जेट उड़ान भर रहे, पांच इंजन मिले
लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) मार्क 1ए कार्यक्रम की प्रगति के बारे में बताते हुए रक्षा सचिव ने कहा, वर्तमान में पांच इंजन उपलब्ध हैं। वहीं पांच विमान पहले से ही उड़ान भर रहे हैं।
भारतीय विक्रेताओं और मुख्य निर्माता, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के लिए उत्पादन काफी हद तक स्थिर हो गया है और इंजन की आपूर्ति स्थिर होने के बाद इसमें और सुधार होगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि हालांकि हथियार परीक्षण सफल रहे हैं, लेकिन भारतीय वायुसेना की कुछ आवश्यकताएं अभी तक पूरी तरह से पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ परिचालन संबंधी आवश्यकताओं में अभी भी सुधार की जरूरत है, लेकिन 180 विमानों के नियोजित ऑर्डर के साथ, उम्मीद है कि समय के साथ इस प्रणाली को और सुधारा जाएगा, ताकि वायु सेना की सभी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

























