ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। कैबिनेट ने शहरी क्षेत्रों में इन्फ्रास्ट्रक्चर को बड़ा प्रोत्साहन देने के लिए एक लाख करोड़ रुपये की कुल केंद्रीय सहायता के साथ अर्बन चैलेंज फंड को मंजूरी दी है। यह फंड 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों, सभी राज्यों की राजधानियों और एक लाख से अधिक आबादी वाले प्रमुख औद्योगिक शहरों को कवर करेगा। इस योजना के तहत केंद्र सरकार परियोजना लागत का 25% हिस्सा वहन करेगी, बशर्ते कि परियोजना के लिए कम से कम 50% धन बाजार से जुटाया गया हो। सरकार का दावा है कि इस पहल से अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्र में कुल चार लाख करोड़ रुपये का निवेश होने की उम्मीद है।
नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने इस योजना को देश के विकास का सबसे बड़ा इंजन बताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘शहरीकरण अगले कुछ दशक तक भारत के विकास का सबसे बड़ा एजेंट होगा। भारत पहले ही दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अर्बन सिस्टम है। दुनिया की कुल शहरी आबादी की 11 फीसदी जनसंख्या भारतीय शहरों में रहती है। यह अमेरिका, जर्मनी, जापान और यूके की शहरी आबादी से ज्यादा है। पहले भारत में शहरीकरण को लेकर एक झिझक थी लेकिन यह योजना एक बहुत बड़ा बदलाव है। इससे शहरों में एक बड़ा परिवर्तन होगा।’
सरकार का दावा
सरकार ने भी एक बयान में कहा कि यह पहल भारत के शहरी विकास दृष्टिकोण में एक बड़े बदलाव की प्रतीक है, जिसके तहत अब अनुदान-आधारित वित्तपोषण के बजाय बाजार से जुड़े, सुधार-आधारित और परिणाम-उन्मुख बुनियादी ढांचे के निर्माण पर जोर दिया जाएगा। शहरी अवसंरचना के विकास पर केंद्रित यह कोष उच्च गुणवत्ता वाले शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए बाजार वित्तपोषण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और नागरिक-केंद्रित सुधारों का लाभ उठाएगा।
बयान के अनुसार, इस कोष का लक्ष्य शहरों को भविष्य की चुनौतियों के प्रति सुदृढ़, उत्पादक, समावेशी और जलवायु-अनुकूल बनाना है, ताकि उन्हें देश की आर्थिक वृद्धि के अगले चरण के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित किया जा सके।
यह कोष वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 तक प्रभावी रहेगा, जिसे वित्त वर्ष 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है। यह योजना बजट 2025-26 के उस दृष्टिकोण को लागू करती है जिसमें शहरों को ‘वृद्धि के केंद्र’ के रूप में विकसित करने और शहरों के रचनात्मक पुनर्विकास का प्रस्ताव दिया गया था।























