ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पिछले दिनों भारत के दौरे पर आए थे। इस दौरान उन्होंने भारत के साथ संबंधों को नई ऊंचाइयाें पर पहुंचाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी। उल्लेखनीय है कि जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री रहते कनाडा के भारत के साथ संबंध अत्यंत खराब हो गए थे। पीएम कार्नी ने सारी खटास को दूर करते हुए भारत के साथ संबंधों के नए युग की शुरुआत की है और अनेक महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी है।
– कनाडा और भारत बैटरी और एनर्जी स्टोरेज के क्षेत्र में लाएंगे क्रांति
इसी के तहत कनाडा के इनोवेशन और भारत के विशाल स्केल को मिलाकर बैटरी और एनर्जी स्टोरेज के क्षेत्र में क्रांति लाई जाएगी। दोनों देश मिलकर साझा एआई कंप्यूट कॉरिडोर और स्टार्ट-अप्स के लिए एआई इनोवेशन सैंडबॉक्स बनाएंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और इंजीनियरिंग में कनाडा की तकनीक और भारत के स्केल को मिलाकर ग्लोबल वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा। भारत के विदेश मंत्री ने बताया कि ईरान संकट को लेकर भारत और कनाडा के बीच बातचीत हुई है। इस चर्चा का उद्देश्य पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को समझना और कूटनीतिक समाधान तलाशना है। दोनों देशों ने माना कि क्षेत्र की अस्थिरता का असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए संकट के प्रभाव को कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोग जरूरी है।
अमेरिका से अलग व्यापार रणनीति
भारत और कनाडा दोनों ही अपने व्यापारिक संबंधों को विविध बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका की टैरिफ नीतियों के बाद कई देश नए आर्थिक साझेदार तलाश रहे हैं। मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियों के बीच भारत और कनाडा स्वच्छ ऊर्जा, खनिज और तकनीकी क्षेत्रों में नए अवसर खोज रहे हैं ताकि वैश्विक व्यापार में संतुलन बनाया जा सके। बैठक के अंत में दोनों नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ पुराने रिश्तों की बहाली नहीं बल्कि भविष्य की नई साझेदारी की शुरुआत है।
क्या-क्या हुआ?
- भारत और कनाडा व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जिसका लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 बिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंचाना है।
- पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद 6 ट्रिलियन डॉलर यानी 6000 अरब से अधिक है जो इसे एक बड़ी वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाता है।
- कनाडाई पेंशन फंड्स ने भारत के विकास और बाजार पर गहरा भरोसा जताते हुए अब तक भारत में लगभग 100 बिलियन डॉलर का निवेश किया है।
- 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा के भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए कनाडा यूरेनियम की निर्बाध सप्लाई करेगा। यह भारत के लिए बेहद अहम निर्णय है।
- क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ी डील हुई है। भारत को इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत है, अब कनाडा यह देगा। इतना ही नहीं, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी होगा।
- भारत-कनाडा-ऑस्ट्रेलिया के बीच एक ट्रायंगल समझौता हुआ है। यह तीन उभरती टेक्नोलॉजी और इनोवेशन वाले देशों के बीच एक अलग तरह की डील है, जो भारत के लिए लाभदायक है।
- फूड प्रोसेसिंग कैपेसिटी को मजबूत करने और पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। इसकी डील भी इस दौरे में हुई। इसका फायदा भारत को होने वाला है।
- भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग और कनाडा की कंपनी कैमेको के बीच यूरेनियम की सप्लाई के लिए लंबी अवधि की डील हुई है। यह 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा के लक्ष्य के लिए अहम है।
- कनाडा 3 वर्षों तक हर साल 300 भारतीय छात्रों को साइंस, इंजीनियरिंग और आर्ट जैसे विषयों में 12 सप्ताह की पूरी तरह से फंडेड रिसर्च इंटर्नशिप देगा।
- रिन्यूएबल एनर्जी पर भी डील हुई है। कनाडा सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में क्षमता निर्माण और बेस्ट प्रैक्टिस शेयर करेगा।
- इन समझौतों के अलावा, विश्वविद्यालयों के बीच एआई और कृषि जैसे क्षेत्रों में 24 पार्टनरशिप्स की घोषणा की गई है। कनाडा अब ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस और इंटरनेशनल सोलर अलायंस में भी शामिल हो गया है। इसके साथ ही रक्षा वार्ता और संसद मैत्री समूह की स्थापना भी की गई।













