ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐसे तलाक को मंजूरी दे दी जिसके लिए 32 साल से केस चल रहा था। इस केस में कुल 61 जगहों पर मामले दर्ज किए गए थे। 1994 से चल रहे तलाक के मुकदमे की जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की बेंच ने सुनवाई की। संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए लंबे समय से अलग रह रहे पति-पत्नी के तलाक को मंजूरी दी गई। यह केस अवमानना के रूप में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। इसी साल जनवरी-फरवरी में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद इसे जल्द निपटारा करने का भरोसा दे दिया था।
न्यायालय ने समाधान की संभावना तलाशने के लिए दोनों पक्षों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत की। इसके बाद न्यायालय द्वारा सुगम बनाई गई एक सुनियोजित वार्ता प्रक्रिया शुरू हुई, जो अंततः आपसी सहमति से तलाक की मांग करने वाले संयुक्त आवेदन के रूप बदल गई। अदालत में दोनों पक्षों की उपस्थिति दर्ज करते हुए, पीठ ने जारी अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि समझौता बिना किसी दबाव या अनुचित प्रभाव के, उनकी स्वतंत्र इच्छा से हुआ था।
पति को पत्नी को 1 करोड़ रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता देना होगा, साथ ही लोनावला स्थित संपत्ति में उसका हिस्सा पंजीकृत उपहार विलेख के माध्यम से हस्तांतरित किया जाएगा। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को रजिस्ट्री में जमा 90 लाख रुपये जारी करने का निर्देश दिया।













