ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। फार्मास्यूटिकल कंपनी बायोकॉन की फाउंडर और चेयरपर्सन किरण मजूमदार-शॉ ने अपना उत्तराधिकारी खोज लिया है। उन्होंने अपनी भतीजी क्लेयर मजूमदार को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया है। क्लेयर के पिता रवि मजूमदार बायोकॉन में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं और किरण मजूमदार-शॉ के भाई हैं। बायोकॉन का शेयर पिछले सत्र में बीएसई पर 368 रुपये पर बंद हुआ था और इस भाव पर कंपनी का मार्केट कैप 59,795.29 करोड़ रुपये है। बायोकॉन की स्थापना किरण मजूमदार-शॉ ने 1978 में की थी। कंपनी का बिजनेस कई देशों में फैला हुआ है।
देश की सबसे अमीर महिलाओं में से एक किरण मजूमदार-शॉ ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘क्लेयर सही समय पर मेरी जगह लेंगी। मैं अभी अपना पद नहीं छोड़ने जा रही हूं।’ किरण मजूमदार-शॉ की कोई संतान नहीं है। क्लेयर सुर्खियों से दूर रहती हैं। वह बोस्टन की कंपनी बिकारा थेराप्यूटिक्स की फाउंडिंग सीईओ हैं। यह बायोकॉन की कंपनी है जो कैंसर की दवा के विकास में लगी है। क्लेयर इससे पहले रियो मेडिसिन्स में बिजनेस डेवलपमेंट और कॉरपोरेट स्ट्रैटजी की हेड रह चुकी हैं। वहां उन्होंने रोश के साथ पार्टनरशिप में अहम भूमिका निभाई थी।
क्लेयर का सफर
क्लेयर ने एमआईटी से बायोलॉजिकल इंजीनियरिंग में बीएससी करने के बाद स्टेनफर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए और कैंसर बायोलॉजी में पीएचडी की। किरण मजूमदार-शॉ ने 10,000 रुपये से एक गैराज से बायोकॉन की शुरुआत की थी। यह कंपनी एंजाइम बनाने का काम करती थी। आज यह एक अरब डॉलर की बायोसिमिलर्स एंटरप्राइज है। बायोकॉन रेगुलेटेड ग्लोबल बायोलॉजिक्स मार्केट में एंटर करने वाली भारत की पहली कंपनी थी। फाइनेंशियल ईयर 2025 में इसका रेवेन्यू 1.8 अरब डॉलर था।
किरण मजूमदार-शॉ की नेटवर्थ
1998 में बायोकॉन में यूनिलीवर ने अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी और यह इंडिपेंडेंट भारतीय कंपनी बनी थी। कंपनी ने 2001 में अपनी आयरिश पार्टनर को खरीदकर पूरा ऑपरेशन कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था। साल 2004 में बायोकॉन की लिस्टिंग हुई थी और लिस्टिंग के दिन इसका मार्केट कैप 1.1 अरब डॉलर पहुंच गया था। बायोकॉन लिस्टिंग के दिन एक अरब डॉलर से ज्यादा का मार्केट कैप हासिल करने वाली भारत की दूसरी कंपनी थी। फोर्ब्स के मुताबिक किरण मजूमदार-शॉ की नेटवर्थ 3.3 अरब डॉलर है।













