ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। जियो स्टारलिंक को टक्क र देने की तैयारी में है। दरअसल रिलायंस इस क्षेत्र में कदम रखने का मन बना चुकी है। इसे लेकर बैठकों का दौर जारी है। इतनी ही नहीं कंपनी किसी बनी-बनाई सैटेलाइट कंपनी को खरीदने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में भारत को स्टारलिंक का देसी वर्जन मिल सकता है।
इंटरनेट की दुनिया में भारत स्टारलिंक का जवाब पेश करने की तैयारी कर रहा है। दरअसल रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन स्पेस में कदम रखने का मन बना लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार मुकेश अंबानी एलन मस्क की स्टारलिक को टक्कर देने की पूरी तैयारी में हैं। दरअसल रिलायंस लो अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स में अरबों डॉलर निवेश करने की योजना बना रहा है। इससे भारत अपना खुद का सैटलाइट इंटरनेट नेटवर्क खड़ा कर सकेगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस अपनी टेलिकॉम यूनिट जियो प्लेटफॉर्मस के तहत सैटेलाइट प्रोजेक्ट को खड़ा करना चाह रहा है। जियो चाहता है कि वह इस क्षेत्र का अहम खिलाड़ी बन सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए जियो ने छह अलग-अलग टीमें बनाई हैं, जो सैटेलाइट्स, लॉन्चिंग, पेलोड और यूजर टर्मिनल्स जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम कर रही हैं।
कुछ महीनों से इस पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। इस सिलसिले में रिलायंस कई सैटेलाइट टेक्नोलॉजी फर्मों के साथ बैठकें कर रही है। कंपनी किसी बनी-बनाई सैटेलाइट कंपनी को खरीदने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है।
ऐसा करना क्यों जरूरी है?
भारत सरकार चाहती है कि देश का अपना सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम हो। ग्लोबल स्तर पर चीन और अन्य देशों की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए भारत के लिए अपना नेटवर्क होना ज्यादा सुरक्षित है। वहीं अगर सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसके लिए स्टारलिंक जैसी दूसरे देशों की तकनीक पर निर्भर रहा जाए, तो यह डेटा प्राइवेसी के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। अपना सैटेलाइट सिस्टम होने से भारत को डिजिटल संप्रभुता मिलेगी और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
रिलायंस अभी इस क्षेत्र में पैर रखने की सोच रहा है लेकिन स्टारलिंक पहले ही मार्केट में अपनी पैठ बना चुका है। इसके अलावा इस क्षेत्र में अमेजन लियो भी बड़ा दावेदार बनकर उभर रहा है। वहीं सुनील मित्तल की भारती ग्रुप भी यूटेलसैट में एक बड़ा निवेशक है।












