ब्लिट्ज ब्यूरो
भोपाल। राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश की है। संस्थान के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने मध्य प्रदेश में पहली बार एक जटिल ‘फ्री फंक्शनिंग मसल ट्रांसफर’ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस अत्याधुनिक माइक्रोसर्जरी के माध्यम से एक 55 वर्षीय पुरुष मरीज के हाथ (कोहनी) की गति को बहाल करने में सफलता मिली है।
सर्जरी में यह थी चुनौती
मरीज ‘पैन ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी’ से पीड़ित था। यह एक ऐसी गंभीर स्थिति है जिसमें चोट के कारण हाथ की नसें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और ऊपरी अंग (हाथ) पूरी तरह लकवाग्रस्त हो जाता है। मरीज अपने हाथ की सभी गतिविधियां खो चुका था, जिससे वह रोज के काम भी नहीं कर पा रहा था।
ऐसे हुई जटिल सर्जरी
इस जटिल ऑपरेशन में डॉक्टरों ने माइक्रोसर्जिकल तकनीक का उपयोग किया। टीम ने मरीज की जांघ से ‘ग्रैसिलिस’ नामक एक कार्यशील मांसपेशी को उसकी नसों और रक्त वाहिकाओं के साथ निकाला। इसके बाद, इसे सावधानीपूर्वक प्रभावित हाथ में प्रत्यारोपित किया गया। इस प्रक्रिया में माइक्रोवैस्कुलर और तंत्रिका एनास्टोमोसिस (बारीक नसों को जोड़ना) किया गया, ताकि मांसपेशी को नई जगह पर रक्त और संकेत मिल सकें।
इन डॉक्टर्स की रही भूमिका
यह ऐतिहासिक सर्जरी प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. दीपक कृष्णा और डॉ. राहुल दुबेपुरिया के नेतृत्व में की गई। एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. अनुज जैन ने किया। एम्स प्रशासन के अनुसार, मरीज की स्थिति अब संतोषजनक है और शुरुआती परिणाम काफी उत्साहजनक हैं। फिलहाल वह कुछ दिनों डॉक्टर की निगरानी में रहेंगे।













