दीपक सहगल
नई दिल्ली। एम्स दिल्ली न केवल भारत बल्कि दुनिया के बेहतरीन मेडिकल इंस्टीट्यूट में गिना जाता है। यदि आप भी इस प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो एम्स दिल्ली का संभावित कट-ऑफ जानें।
हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना आंखों में सजाकर ‘नीट’ की परीक्षा देते हैं, लेकिन उन सबका सबसे बड़ा सपना होता है—एम्स दिल्ली। देश के इस नंबर-1 मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिलना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।
हाल ही में जारी आंकड़ों और पिछले वर्षों के रुझानों के आधार पर, नीट यूजी 2026 के लिए एम्स दिल्ली का संभावित कट-ऑफ सामने आया है। यदि आप भी इस प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
क्यों है यह इतना खास?
एम्स दिल्ली न केवल भारत बल्कि दुनिया के बेहतरीन मेडिकल इंस्टीट्यूट में गिना जाता है। यहां की विश्वस्तरीय लैब, अनुभवी फैकल्टी और सबसे कम फीस इसे छात्रों की पहली पसंद बनाती है। लेकिन यहां सीटों की संख्या बहुत सीमित है। कुल 132 सीटों पर होने वाले इस महामुकाबले में केवल ‘टॉपर्स’ ही जगह बना पाते हैं।
कैटेगरी के अनुसार संभावित रैंक और कट-ऑफ
एम्स दिल्ली में दाखिले के लिए केवल पास होना काफी नहीं है, बल्कि आपको ‘ऑल इंडिया रैंक’ में बहुत ऊपर रहना होगा। एक्सपर्ट के अनुसार, 2026 के लिए संभावित क्लोजिंग रैंक इस प्रकार हो सकती है:
सामान्य वर्ग : यदि आप जनरल कैटेगरी से हैं, तो आपको एआईआर 50 के अंदर आना होगा। पिछले साल यह रैंक 47-48 पर बंद हो गई थी। इसके लिए कम से कम 710+ अंक सुरक्षित माने जा रहे हैं।
ओबीसी वर्ग: इस श्रेणी के छात्रों के लिए क्लोजिंग रैंक 240 से 250 के बीच रहने की उम्मीद है।
ईडब्ल्यूएस वर्ग: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए रैंक 260 के आसपास समाप्त हो सकती है।
एससी वर्ग: अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों को 840 से 900 रैंक के भीतर जगह बनानी होगी।
एसटी वर्ग: अनुसूचित जनजाति के लिए यह रैंक 2000 से 2200 तक जा सकती है।
पेपर के कठिनाई स्तर के आधार पर मार्क्स हर साल बदलते हैं, लेकिन एम्स दिल्ली के लिए एक सुरक्षित स्कोर (सेफ स्कोर) हमेशा 700 से ऊपर ही रहता है। सामान्य और ओबीसी वर्ग के छात्रों को 720 में से 705-715 का लक्ष्य रखना चाहिए। एससी/एसटी वर्ग के लिए भी प्रतियोगिता कम नहीं है, उन्हें भी 670-680+ अंक लाने की कोशिश करनी चाहिए।
एम्स दिल्ली में कुल 132 सीटों का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है:
अनारक्षित: 55 सीटें
ओबीसी: 32 सीटें
ससी: 18 सीटें
एसटी: 09 सीटें
ईडब्ल्यूएस: 11 सीटें
विदेशी छात्र: 07 सीटें
सफलता के लिए टिप्स
इतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए, छात्रों को एनसीईआरटी की किताबों पर अपनी पकड़ मजबूत करनी चाहिए। पिछले 5-10 सालों के प्रश्नपत्रों को हल करना और नियमित रूप से ‘मॉक टेस्ट’ देना ही सफलता की असली कुंजी है। याद रखें, एम्स दिल्ली में एक-एक नंबर पर सैकड़ों रैंक का अंतर आ जाता है, इसलिए आपकी सही तैयारी ही आपको मंजिल तक पहुंचाएगी।













