ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। अगर आप धूम्रपान नहीं करते तो भी आपके फेफड़े सुरक्षित नहीं हैं। दिल्ली की जहरीली हवा अब सिगरेट के धुएं से ज्यादा घातक साबित हो रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि फेफड़ों के कैंसर के हर 10 में से 3 मरीज ऐसे हैं, जिन्होंने कभी तंबाकू को हाथ तक नहीं लगाया।
इसी गंभीर खतरे की गुत्थी सुलझाने के लिए दिल्ली में शोध शुरू किया है, जो बताएगा कि पीएम 2.5 का जहर कैसे हमारे शरीर में कैंसर का बीज बो रहा है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रेडिएशन आंकोलॉजी के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शंकर के अनुसार फेफड़े का कैंसर देश में कैंसर का चौथा सबसे कारण है। हर साल 75 हजार से ज्यादा
लोग इसकी चपेट में आते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 30 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जिन्होंने कभी तंबाकू का सेवन नहीं किया। इनमें भी युवाओं और महिलाओं की संख्या अधिक है। धूम्रपान न करने वाले मरीजों में यह बीमारी सामान्य मरीजों के मुकाबले 10 वर्ष पहले ही देखी जा रही है।
शोध में पीएम 2.5 के दुष्प्रभाव देखे जाएंगे
शोध में मुख्यतः पीएम 2.5 के दुष्प्रभावों का आकलन किया जाएगा। इसके लिए अमेरिका के बीएमएस फाउंडेशन ने फंड जारी किया है। अध्ययन में 1,615 कैंसर मरीजों के साथ इतने ही सामान्य लोगों को भी शामिल किया जाएगा।
तीन साल तक चलने वाले अध्ययन का मुख्य उद्देश्य ‘बायोमार्कर’ की पहचान करना है। इससे प्रदूषण के कारण होने वाले कैंसर की शुरुआती जांच संभव होगी। उन लोगों की पहचान की जा सकेगी जिन्हें कैंसर का जोखिम सबसे अधिक है। शोध टीम में डॉ. सुनील कुमार (सर्जिकल आंकोलॉजी), डॉ. रंभा पांडे (रेडिएशन आंकोलॉजी), डॉ. सच्चिदानंद जी भारती (एनेस्थीसिया), डॉ. चंद्र प्रकाश प्रसाद और डॉ. मयंक सिंह शामिल रहे।













