ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव के माहौल के बीच चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने समुद्र में एक विशेष डीगॉसिंग अभ्यास किया है। इस अभ्यास में पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल किया गया। चीन ने बाद में बताया कि इस अभ्यास में उन सैनिकों ने भाग लिया, जो हाई लेवल खतरों की परिस्थितियों में ट्रेनिंग कर रहे थे, ताकि भविष्य में युद्ध की स्थिति में तेज निर्णय ले सकें।
पीएलए के नॉर्दर्न थिएटर कमांड की नौसेना इकाई द्वारा किए गए इस अभ्यास में एक युद्धपोत को क्षतिग्रस्त स्थिति में मानते हुए उसके चुंबकीय प्रभाव को कम करने की प्रक्रिया (डीगॉसिंग) को अंजाम दिया गया। इस दौरान जवानों ने चुंबकीय डिटेक्टर, पोजिशनिंग उपकरण और डीगॉसिंग वायर जैसे उपकरणों का प्रयोग किया।
डीगॉसिंग एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिससे युद्धपोतों का चुंबकीय हस्ताक्षर कम किया जाता है ताकि वे चुंबकीय समुद्री खानों और सेंसरों से बच सकें। पीएलए का कहना है कि युद्धपोतों की चुंबकीय पहचान समय के साथ बढ़ जाती है, जिसे समय-समय पर कम करना जरूरी होता है। यह पहली बार था जब डीगॉसिंग में एआई-आधारित निर्णय प्रणाली को शामिल किया गया।













