ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। असम में बीजेपी की लगातार तीसरी बार जीत यह सिद्ध करती है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की रणनीति और विकास मॉडल को जनता ने पूर्ण समर्थन दिया है। यह स्थिरता, विकास और पहचान आधारित राजनीति के संतुलित मिश्रण का परिणाम है।
असम में बीजेपी की जीत के बड़े फैक्टर कुछ इस प्रकार हैं-
स्थिर नेतृत्व और शासन का विश्वास
पिछले कार्यकाल में बुनियादी ढांचे, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार ने बीजेपी सरकार की विश्वसनीयता बढ़ाई। मतदाताओं ने ‘परफॉर्मेंस’ के आधार पर पुनः जनादेश दिया।
संस्कृति आधारित राजनीति का प्रभाव
असम में विदेशी घुसपैठ, नागरिकता और स्थानीय अस्मिता जैसे मुद्दे लंबे समय से राजनीति के केंद्र में रहे हैं। बीजेपी ने इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाकर बहुसंख्यक मतदाताओं का समर्थन बनाए रखा। 2023 में हुए निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन ने असम की राजनीति की दिशा बदल दी। विश्लेषकों का मानना है कि इससे उन क्षेत्रों में मुस्लिम वोटों का प्रभाव कम हुआ जहां वे निर्णायक भूमिका में थे।
विकास योजनाओं का जमीनी क्रियान्वयन
केंद्र और राज्य की योजनाओं (जैसे आवास, स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा) का लाभ सीधे मतदाताओं तक पहुंचाया गया जिससे सरकार के प्रति वोटरों में सकारात्मक धारणा बनी। असम सरकार की ‘ओरुनोडोई’ योजना ने महिला मतदाताओं के बीच बीजेपी की पकड़ को अत्यंत मजबूत बनाया। प्रतिमाह सीधे बैंक खातों में आने वाली राशि ने एक ऐसा ‘साइलेंट वोटर’ आधार तैयार किया जो जाति और धर्म की सीमाओं से परे था।
विपक्ष की कमजोरी
कांग्रेस और अन्य दलों के बीच समन्वय की कमी और मजबूत वैकल्पिक नेतृत्व का अभाव बीजेपी के पक्ष में गया।
संगठनात्मक मजबूती
बीजेपी का बूथ स्तर तक मजबूत नेटवर्क और चुनावी प्रबंधन उसकी सफलता का बड़ा कारण रहा।
क्षेत्रीय संतुलन की रणनीति
बीजेपी ने असम के विभिन्न जातीय और क्षेत्रीय समूहों (बोडो, जनजातीय और अन्य समुदायों) के साथ गठजोड़ बनाकर व्यापक सामाजिक आधार तैयार किया। हिमंत बिस्वा सरमा ने घुसपैठ, संदिग्ध नागरिकों और असमिया संस्कृति के संरक्षण के मुद्दों को प्रखरता से उठाया। उन्होंने ‘असमिया राष्ट्रवाद’ को ‘हिंदुत्व’ के साथ जोड़कर एक ऐसा समावेशी फॉर्मूला तैयार किया जिसने कांग्रेस और एआईयूडीएफ के गठबंधन को काफी पीछे छोड़ दिया।













