ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत अब अपना स्वदेशी मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम बना रहा है। यह डीआरडीओ द्वारा विकसित किए गए वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (विशोराड्स) का हल्का वर्जन होगा।
डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने हाल ही में ट्राइपॉड पर लगे वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (विशोराड्स) का सफल परीक्षण किया था। अब इसी हथियार का कंधे से दागा जाने वाला वर्जन बनाने की दिशा में भी काम शुरू हो गया है। डीआरडीओ का लक्ष्य एक ऐसा मिसाइल डिफेंस सिस्टम विकसित करना है जिसे सैनिक कंधे पर रखे लॉन्चर से फायर कर सकेंगे।
क्या है वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम?
लंबी दूरी तक निशाना लगाने के लिए भारत के पास पहले से ही कई एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं। डीआरडीओ अग्रिम चौकियों और पहाड़ों पर बनी सेना की पोस्ट को सुरक्षित रखने के लिए वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम भी विकसित कर चुका है। इसे ट्राइपॉड पर फिट किया जा सकता है।
भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि
मौजूदा ट्राइपॉड-आधारित विशोराड्स भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसमें इस्तेमाल की जाने वाली मिसाइल का वजन लगभग 20.5 किलोग्राम है। ट्राइपॉड और अन्य यंत्रों के साथ इसे जोड़ देने से पूरे सिस्टम का वजन लगभग 40 किलोग्राम हो जाता है।
कैसे दी जाएगी अमेरिका और रूस को टक्कर?
सैनिक द्वारा ले जाने योग्य और सीधे कंधे से दागने में सक्षम डिफेंस सिस्टम के मामले में अमेरिका के एफआईएम-92 स्टिंगर और रूस के वेर्बा या इग्ला-एस को सबसे बेहतर माना जाता है। अब कुछ सालों में भारत के पास अपना मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम होगा भारत का मैनपैड्स कैसा होगा?
डीआरडीओ की योजना 15 से 18 किलोग्राम वजन वाले मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम विकसित करने की है। इसकी मारक क्षमता ट्राइपॉड-आधारित मिसाइल डिफेंस के बराबर ही होगी। इसकी मदद से ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों में होने वाली लड़ाई में भी भारतीय सैनिक दुश्मन पर भारी रहेंगे।
भारत को क्यों चाहिए
मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम उन सैनिकों के लिए बेहद असरदार साबित होता है जो ऊंची चोटियों की रखवाली करते हैं। इसकी मदद से दुश्मन के ड्रोन, हमलावर हेलीकॉप्टरों और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों से निपटने में बढ़त मिलती है।
विशोराड्स सेना में शामिल होने के लिए तैयार
ट्राइपॉड वाले वर्जन के सभी परीक्षण पूरे हो चुके हैं और सशस्त्र बल अभी इसका यूजर ट्रायल कर रहे हैं। यह सिस्टम अब आधिकारिक तौर पर सेना में शामिल होने के लिए लगभग तैयार है। अब हैदराबाद स्थित डीआरडीओ का रिसर्च सेंटर छोटे आकार वाली विशोराड्स मिसाइल को डिजाइन करने पर काम कर रहा है।
भारत के मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस की रेंज
कंधे से दागी जाने वाली इस नई प्रणाली की रेंज 6 किलोमीटर तक होगी। यह 3.5 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी लक्ष्य भेदने की क्षमता रखेगी। वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम में एक इमेजिंग इंफ्रारेड (आईआईआर) सीकर भी है जो लक्ष्य को खोज कर खत्म करने में सक्षम है।













