ब्लिट्ज ब्यूरो
मुंबई। बीएमसी ने इस वर्ष से एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है, जिसके तहत बीएमसी के अस्पतालों में उपचार करा रहे कम से कम 25% मरीजों का विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत इलाज किया जाएगा। योजनाओं से प्राप्त पैसों को स्वास्थ्य सिस्टम संचालन के उपयोग में खर्च किया जाएगा। इससे बीएमसी का बोझ काफी हद तक कम होगा।
बीएमसी के एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि अस्पतालों में बड़ी संख्या में सर्जरी होती है। इसमें केवल 4 से 5% मरीजों का उपचार महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत किया जाता है। अब एम्प्लाइज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन और एम्प्लॉईज ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम को भी जोड़ा जाएगा। उपचार पर होने वाला खर्च संबंधित योजना से बीएमसी को प्रतिपूर्ति के रूप में वापस मिलेगा। बीएमसी कर्मचारियों के इलाज का खर्च भी ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम से वसूले जाने की बात कही गई है।
बीएमसी पर सीधा बोझ कम होगा
बीएमसी के इस घोषणा पर हेल्थ एक्सपर्ट रवि दुग्गल ने बताया कि मरीजों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर इलाज का खर्च वापस लेना अच्छी सोच है। इससे बीएमसी पर सीधा आर्थिक बोझ कम हो सकता है लेकिन सिर्फ बीमा योजनाओं पर निर्भर रहना ठीक नहीं है, क्योंकि कई बार भुगतान समय पर नहीं मिलता। बीएमसी के पास पर्याप्त पैसा है, फिर भी स्वास्थ्य पर खर्च कम किया जा रहा है। डॉक्टर, दवाइयां और रोजमर्रा की सुविधाओं पर भी बराबर ध्यान देना चाहिए। अगर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत नहीं किया गया, तो आम मरीजों को परेशानी होगी।
हर साल 2.50 लाख मरीज होते हैं भर्ती
बीएमसी के केवल प्रमुख अस्पतालों में ही सालाना 60 लाख मरीज ओपीडी में इलाज के लिए आते हैं, जबकि 2.50 लाख मरीजों को भर्ती की जरूरत पड़ती है और करीब 1.50 लाख सर्जरी की जाती है। वही उपनगरीय अस्पतालों में 53 लाख के करीब ओपीडी, 1.90 लाख मरीज भर्ती होते है और 42,000 ऑपरेशन होते हैं।
भविष्य में बढ़ेगा दायरा
अधिकारी ने आगे बताया कि अभी तक कई मरीजों का इलाज बीएमसी के बजट या मरीजों की जेब से होता था। अब अधिकतम मरीजों का योजनाओं में पंजीकरण कर फंड की वापसी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे बीएमसी पर वित्तीय बोझ कम होगा।

























