ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उड़ान-2 को मंजूरी दे दी है। इसका मकसद रीजनल एयर कनेक्टिविटी को मजबूत करना और देशभर में मौजूदा एविएशन इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया जाएगा। इसके तहत 100 नए एयरपोर्ट्स विकसित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मॉडिफाइड उड़ान योजना 10 साल यानी वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक के लिए होगी। इसके लिए 28,840 करोड़ रुपये का बजटीय सपोर्ट रखा गया है।
सरकार के 2047 के विजन के अनुरूप
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि यह सरकार के 2047 के विजन के अनुरूप है। उड़ान-2.0 से छोटे शहरों में एयर कनेक्टिविटी बढ़ेगी और वहां आर्थिक गतिविधियों, ट्रेड और टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। उड़ान योजना को अक्तूबर 2016 में लॉन्च किया गया था। इसका मकसद आम लोगों के लिए हवाई यातायात को सस्ता बनाना और टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में एयर कनेक्टिविटी बढ़ाना था। पिछले 9 साल में 95 एयरपोर्ट्स, हेलीपोर्ट्स और एयरोड्रोम्स में 663 रूट्स ऑपरेशनलाइज्ड किए गए हैं।
मॉडिफाइड उड़ान स्कीम के तहत रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मौजूदा अनसर्व्ड एयरट्रिप्स से 100 एयरपोर्ट्स विकसित किए जाएंगे। वैष्णव ने कहा कि इस योजना के तहत 100 नए एयरपोर्ट्स को चैलेंज मोड में विकसित किया जाएगा। इसमें प्रति एयरपोर्ट औसत लागत 100 करोड़ रुपये होगी और कुल बजटरी सपोर्ट 12,159 करोड़ रुपये का होगा। इस योजना के तहत 200 मॉडर्न हेलीपैड भी विकसित किए जाएंगे। इसके लिए 3,661 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसका मकसद पहाड़ी, पूर्वोत्तर, द्वीपीय और एस्पिरेशन रीजन्स में एयर कनेक्टिविटी में सुधार लाना है। एयरलाइन्स को सपोर्ट करने के लिए केंद्र अगले पांच साल तक 80 से 90 फीसदी वायबिलिटी गैप फंडिंग देगा। इसके लिए 10.043 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।













