ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत की न्यायिक व्यवस्था का खास स्थान है। इससे पूरी न्यायिक प्रणाली में अदालतों को संस्थागत सीख मिलती है। साथ ही भारतीय न्यायिक व्यवस्था दूसरे देशों के साथ गहरा न्यायिक सहयोग और भागीदारी भी करती है।
सूर्यकांत ने कहा-अदालतों की वैधता महज निर्णय देने तक सीमित नहीं है। यह उनकी साख, पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच को आसान बनाने पर भी निर्भर करती है।
उन्होंने कहा-तकनीक को जब पूरी सोच के साथ एकीकृत किया जाए तो यह न्याय देने में बदलाव ला सकती है और कोर्टों को नागरिकों के करीब ला सकती है।
भारत के अनुभव का लाभ उठाए दुनिया
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा-भारत का विशाल न्यायिक अनुभव इसके मजबूत संवैधानिक ढांचे, अदालतों के कामकाज के तरीके और तेजी से विकसित हो रही तकनीक आधारित न्याय वितरण प्रणाली पर आधारित है।
साइबर अपराध भौगोलिक सीमा को नहीं मानते
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आगे कहा कि डिजिटल जगत को प्रभावित करने वाले अंतरराष्ट्रीय खतरों से निपटने के लिए कानूनी प्रणालियों को अधिकाधिक सहयोग करना होगा। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा-साइबर जगत में होने वाले अपराध भौगोलिक सीमाओं का सम्मान नहीं करते।
कानून का शासन राष्ट्रीय सीमाओं से परे
आज कानून का शासन राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाता है। अदालतें एक-दूसरे के अनुभव से सीखती हैं।
अधिकारों की रक्षा करना, संस्थाओं को मजबूत करना और न्याय तक पहुंच आसान बनाना जैसी चीजें कोर्ट अनुभवों से सीखते हैं। भारत की न्यायिक यात्रा संवैधानिक मूल्यों को व्यावहारिक इनोवेशंस के साथ तालमेल बिठाती रही है। यह वैश्विक बातचीत में अपना योगदान दे सकती है।













