ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। पीएम मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर वैश्विक नेताओं ने उनके बेहतरीन शासन, विकासशील देशों के लिए उनकी आवाज उठाने और एक मजबूत भारत के उनके विजन की तारीफ की है।
दुनियाभर के नेताओं ने उन्हें बधाई दी है। भारतीय जनता पार्टी ने सरकार की प्रमुख उपल्बधियों, सुधार और कल्याणकारी पहलों को प्रदर्शित करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है।
श्रीलंका के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को भेजा बधाई संदेश
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने पत्र लिखकर पीएम मोदी को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह रिकॉर्ड दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लोगों के पीएम मोदी पर अटूट भरोसे को दिखाता है। उन्होंने भारत में हुए आर्थिक और सामाजिक बदलावों की सराहना की और कहा कि पीएम मोदी का विजन श्रीलंका सहित कई देशों को प्रेरित करता है। पीएम मोदी ने 4-6 अप्रैल 2025 को श्रीलंका का दौरा किया था। इस दौरान उन्हें श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘मित्र विभूषण’ दिया गया था। भारत ने ‘पड़ोसी पहले’ की नीति के तहत 2022 के आर्थिक संकट में श्रीलंका की बड़ी मदद की थी।
पापुआ न्यू गिनी ने बताया ‘रोल मॉडल’
पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे ने वीडियो संदेश में पीएम मोदी को नेतृत्व का एक आदर्श उदाहरण और रोल मॉडल बताया। पीएम मोदी के काम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में 20 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकालना एक अद्भुत और ऐतिहासिक काम है। पीएम मोदी ने मई 2023 में पापुआ न्यू गिनी का ऐतिहासिक दौरा किया था। वे वहां जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे। उन्होंने वहां भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग मंच के शिखर सम्मेलन में भाग लिया था।
‘वैश्विक मुद्दों पर भारत बड़ी आवाज’
त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर ने बधाई देते हुए कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक मुद्दों पर एक प्रमुख आवाज बनकर उभरा है। उन्होंने पीएम मोदी के एक साधारण पृष्ठभूमि से उठकर 140 करोड़ लोगों के देश का लगातार तीन बार नेतृत्व करने के सफर की सराहना की। साथ ही भारत की विदेश नीति, आर्थिक तरक्क ी और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को सराहा। पीएम मोदी ने 3-4 जुलाई 2025 को त्रिनिदाद और टोबैगो का दौरा किया था। 26 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला द्विपक्षीय दौरा था। यह दौरा त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय प्रवासियों के आगमन की 180वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुआ था।













