ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। अमेरिका एक कार-केंद्रित देश है, जिसका मतलब है कि यहां पर अगर आपके पास अपनी गाड़ी नहीं है, तो फिर कहीं आना-जाना मुश्किल हो जाएगा। यही वजह है कि जब भी कोई विदेशी नागरिक अमेरिका पहुंचता है, तो वह तुरंत ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई करना चाहता है। अच्छी बात ये है कि यहां पर विदेशी छात्रों को भी ड्राइविंग लाइसेंस लेने की इजाजत है। डीएल होने पर न सिर्फ आने-जाने की आजादी मिल जाती है, बल्कि यह छात्रों की पहचान का सबसे पुख्ता डॉक्यूमेंट भी बन जाता है।
अमेरिका में विदेशी छात्रों को ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने से पहले कुछ जरूरी बातों का ख्याल रखना होता है। इसमें सबसे जरूरी है सही समय का चुनाव। अमेरिका पहुंचते ही तुरंत ‘डिपार्टमेंट ऑफ मोटर व्हीकल’ (डीएमवी) जाने की जरूरत नहीं है। डीएमवी के नियमों के मुताबिक, अमेरिका में एंट्री लेने के कम से कम 10 दिन बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अप्लाई किया जा सकता है। इससे स्टूडेंट की एंट्री का डेटा (सीबीपी डेटा) और डीएमवी का सिस्टम आपस में सिंक हो जाता है। रिकॉर्ड एक्टिव होना भी जरूरी है। ये एक्टिव होने के 2-3 दिन बाद ही लाइसेंस के लिए जाना होता है।
लाइसेंस के लिए कौन से डॉक्यूमेंट चाहिए?
वैलिड पासपोर्ट
I-20 फॉर्म
I-94 रिकॉर्ड
सोशल सिक्योरिटी नंबर (एसएसएन)
अगर स्टूडेंट के पास एसएसएन नहीं है, तो फिर सोशल सिक्योरिटी ऑफिस जाकर इनएलिजिबलिटी लैटर’ (एसएसए-एल676) लेना पड़ता है। इस लेटर के जरिए डीएमडब्ल्यू को मालूम पड़ता है कि स्टूडेंट कानूनी तौर पर अमेरिका में है, लेकिन उसके पास अभी एसएसएन नहीं है। स्टूडेंट को दो ऐसे डॉक्यूमेंट की जरूरत होती है, जिनके जरिए स्थानीय अमेरिकी पते का सबूत मिल जाए। इसमें रेंट एग्रीमेंट, बिजली बिल, बैंक स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज शामिल हैं। इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट (आईडीपी) रखने वाले भारतीय छात्र कुछ अमेरिकी राज्यों में 30 से 90 दिनों तक कार चला सकते हैं। मगर इसके बाद उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत पड़ेगी। लाइसेंस मिलने के बाद हमेशा इंश्योरेंस वाली गाड़ी ही चलाएं। साथ ही शराब पीकर कभी भी गाड़ी नहीं चलाएं, क्योंकि ऐसा करने पर भारी जुर्माने के साथ स्टूडेंट वीजा रद होने तक का सामना करना पड़ सकता है।
ड्राइविंग लाइसेंस कैसे बनवाएं?
लिखित परीक्षा
सबसे पहले कंप्यूटर-बेस्ड एक टेस्ट देना होता है। इसमें ट्रैफिक से जुड़े नियमों और रोड साइन्स के बारे में विभाग द्वारा पूछा जाता है।
विजन टेस्ट
लाइसेंस बनवाने से पहले आंखों की जांच करवानी होती है, ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि सड़क के संकेतों को साफ तौर पर पढ़ा जा सकता है।
लर्नर परमिट
लिखित परीक्षा पास करने के बाद परमिट मिलता है। इसके जरिए गाड़ी चलाना सीखा जा सकता है।
रोड टेस्ट
इसके लिए गाड़ी चलाकर दिखाना होता है। टेस्ट के लिए गाड़ी खुद लेकर ही जानी होती है।













