ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। ईरान युद्ध के बाद समुद्र में जिस तरह से जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है, उस पर भारत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। लंदन में आयोजित इंटरनेशनल मैरिटाइम ऑर्गनाइजेशन (आईएमओ) परिषद की बैठक में यूके में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी ने स्पष्ट कहा कि अंतरराष्ट्रीय जल मार्गों में जहाजों को निशाना बनाया जाना किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, भारत को इस बात की गहरी चिंता है कि समुद्र में अब व्यापारिक जहाज भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध होता है तो सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को होने लगती है। आम लोगों को ही निशाना बनाया जाता है जो कि एकदम गलत है।
उन्होंने कहा, जितनी जल्दी हो सके यह युद्ध थमना चाहिए। तीन भारतीयों जी जान जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि व्यापारिक जहाजों या फिर सिविलियन मैरिटाइम इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना अनैतिक है। युद्ध के कारण बढ़ती ऊर्जा कीमतों से निपटने के लिए ब्रसेल्स में हुई यूरोपीय संघ के नेताओं की बैठक में भी होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और पश्चिम एशिया में जल एवं ऊर्जा अवसंरचना पर हवाई हमले रोकने की मांग की गई।
भारतीय उच्चायुक्त ने चिंता जताई है कि पूरी दुनिया में लगभग 13 फीसदी नाविक भारतीय हैं। ऐसे में इस युद्ध में जिस तरह जहाजों और नावों को निशाना बनाया जा रहा है उससे भारतीय नाविकों की जान खतरे में है। आईएमओ काउंसिल ने भी ईरान के हमलों की निंदा करते हुए इस तरह के हमलों को रोकने की बात कही है। इस बैठक में लगभग 120 देशों के प्रतिनिधि शामि हुए थे।
यूरोपीय परिषद ने भी होर्मुज खोलने का दबाव बनाया
यूरोपीय परिषद के नाम से जाने जाने वाले 27 यूरोपीय संघ देशों के सभी प्रमुखों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करने और युद्धरत पक्षों से “तनाव कम करने और अधिकतम संयम बरतने” का आह्वान किया। नेताओं ने ईरान से फारस की खाड़ी के पार पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का आग्रह किया, पश्चिम एशिया में संभावित बड़े पैमाने पर शरणार्थी संकट को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग मांगा और कहा कि यूरोपीय संघ के कुछ देश “होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने” के तरीकों पर विचार कर रहे हैं।
यूरोपीय संघ के नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस अनुरोध को ठुकरा दिया है जिसमें उन्होंने देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए सैन्य साजो-सामान भेजने की बात कही थी। होर्मुज जलडमरूमध्य तेल, गैस और उर्वरक के वैश्विक प्रवाह का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। युद्ध के कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और यूरोप में नए शरणार्थी संकट की आशंकाओं ने नेताओं को शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया को प्राथमिकता देने के लिए बाध्य किया।













