ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ऐसी तकनीक पर काम रही है, जो भविष्य में बनने वाली सड़कों पर दरारें और गड्ढे नहीं होने देगी। सेल्फ हीलिंग (स्व-उपचार) नामक यह तकनीक सड़क पर दरारें पड़ने से पहले उसे भर देगी, जिससे गड्ढे नहीं बनेंगे।
भारत में हर साल गड्ढों के कारण औसतन 5,000 सड़क हादसों में लगभग 2,000 लोगों की जान जाती है। वहीं, इस तकनीक के अपनाने से सरकार को हर वर्ष छह से आठ हजार करोड़ रुपये की बचत होगी। सरकार इस रकम को गड्डों को ठीक करने पर खर्च कर देती है। सड़क परिवहन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने
बताया कि भारत जैसे विशाल सड़क नेटवर्क वाले देश के लिए सेल्फ-हीलिंग तकनीक केवल एक लग्जरी नहीं, बल्कि एक आवश्यकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव के लिए सालाना 15 से 20 हजार करोड़ रुपये के बीच बजट आवंटित करती है। इस रखरखाव बजट का एक बड़ा हिस्सा केवल उन हिस्सों की मरम्मत और पैच-वर्क में चला जाता है, जो बारिश और जलजमाव के कारण खराब होते हैं।
क्या है सेल्फ हीलिंग तकनीक : हर साल मानसून और भारी ट्रैफिक के कारण डामर की सड़कें दरारों व गड्डों के कारण खराब होती हैं। इससे निपटने के लिए सरकार सेल्फ हीलिंग
तकनीक अपनाने की तैयारी कर रही है। इसमें डामर में बहुत छोटे-छोटे स्टील वूल (एल्यूमीनियम, कांस्य, स्टेनलेस स्टील से बने तारों के गुच्छे) के टुकड़े या माइक्रो-कैप्सूल मिलाए जाते हैं।













