ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। पानी के अंदर अपनी ताकत बढ़ाने में सक्षम एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से लैस भारतीय नौसेना की पहली सबमरीन इस साल के अंत तक तैयार हो जाएगी। उस समय इसके बेड़े में मौजूद छह फ्रेंच कलवरी (स्कॉर्पीन) क्लास सबमरीन में से दूसरी में स्वदेशी एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) सिस्टम लगाया जाएगा।
फ्रांस की मदद से बनी थी डीजल-इलेक्टि्रक अटैक सबमरीन
दिसंबर 2017 और जनवरी 2025 के बीच, छह कलवरी-क्लास कन्वेंशनल डीजल-इलेक्टि्रक अटैक सबमरीन को सर्विस में शामिल किया गया। इन जहाजों को सरकारी कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने फ्रांस के नेवल ग्रुप के साथ एक ट्रांसफर-ऑफ-टेक्नोलॉजी अरेंजमेंट के तहत बनाया है। ट्रांसफर-ऑफ-टेक्नोलॉजी अरेंजमेंट का मतलब है कि दूसरे देश से तकनीक लेकर इसे भारत में विकसित करना।
एआईपी टेक्नोलॉजी से लैस भारत की पहली सबमरीन
मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस टेक्नोलॉजी से लैस यह पहली सबमरीन पहले से ही तैयार की जा रही है। इसलिए अभी उसमें एआईपी सिस्टम नहीं लगाया जाएगा। हालांकि, दूसरी सबमरीन साल के बीच में तैयार हो जाएगा और यह इस टेक्नोलॉजी से लैस होने वाली भारत की पहली सबमरीन बन जाएगी। एआईपी सिस्टम को सबमरीन के हल को काटकर और उस हिस्से को “प्लग इन” करके इंस्टाल किया जाएगा जिसमें टेक्नोलॉजी होगी।
सूत्रों ने बताया कि अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक हुआ, तो यह प्रक्रिया साल के आखिर तक पूरा हो जानी चाहिए, जिसके बाद सिस्टम और सबमरीन का ट्रायल होगा।
एआईपी एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो पारंपरिक सबमरीन को बिना सतह पर आए या हवा में स्नोर्कल का इस्तेमाल किए पानी के अंदर पावर जेनरेट करने में सक्षम बनाती है।
जहाज को ज्यादा देर तक पानी में रहने लायक बनाकर, यह पानी के अंदर उसकी मजबूती, चुपके से काम करने की क्षमता और सर्वाइव करने की क्षमता को बढ़ाता है।
इस सिस्टम को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने देश में ही विकसित किया है, जिसमें लार्सन एंड टूब्रो डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर है।
मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड नई टेक्नोलॉजी लगाएगी
एक और रक्षा सूत्र ने बताया कि “एनर्जी यूनिट”, जो सबमरीन पर फिट होने के बाद एआईपी बनाएगी, लगभग तीन महीने में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को मिल जाएगी। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड पनडुब्बी में एआईपी प्लग लगाने का काम करेगी।













