गुलशन वर्मा
नई दिल्ली। भारत की ‘वाॅटर स्ट्राइक’ से पािकस्तान में हाहाकार मच गया है। शासकों के साथ आम जनता यह सोच रही है कि यदि भारत ने पूरा पानी रोक दिया तो क्या होगा। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही संकट में है। ऐसे में सिंधु नदी का पानी रोके जाने से पाकिस्तान की माली हालत और खराब हो जाएगी। भारत ने 22 अप्रैल को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों द्वारा पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया है। पिछले हफ्ते भारत-पाकिस्तान सैन्य झड़प के बाद हुए संघर्ष विराम के बावजूद भारत ने सिंधु जल समझौते का स्थगन बरकरार रखा है। ऐसे में भारत सरकार ने सिंधु नदी के पानी का देश में इस्तेमाल करने पर अमल करना शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने सिंधु जल प्रणाली के अंतर्गत आने वाली तीन नदियों सिंधु, चिनाब और झेलम पर परियोजनाओं को पूरा करने में तेजी लाने का आदेश दिया है। इसके तहत एक प्रमुख योजना में चिनाब पर रणबीर नहर की लंबाई को दोगुना करके 120 किमी करना शामिल है, जो भारत से होकर पाकिस्तान के कृषि पावरहाउस पंजाब तक जाती है। नहर का निर्माण 19वीं शताब्दी में हुआ था, संधि पर हस्ताक्षर होने से बहुत पहले।
रणबीर नहर परियोजना पर तेजी लाएगा भारत
भारत को सिंचाई के लिए चिनाब से सीमित मात्रा में पानी इस्तेमाल करने की अनुमति है, लेकिन इस विस्तारित नहर से वर्तमान में लगभग 40 क्यूबिक मीटर से 150 क्यूबिक मीटर पानी प्रति सेकंड का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि, विशषज्ञों का कहना है कि इस नहर के इस्तेमाल में वर्षों लग सकते हैं। रणबीर नहर के बारे में भारत सरकार ने आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस परियोजना में तेजी देखी जा सकती है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने आतंकवादियों के आका पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर ’ समेत जो एक्शन लिए हैं, पूरी दुनिया ने उनका असर देखा है। आतंकी हमले के तत्काल बाद भारत ने पहला बड़ा एक्शन ‘वॉटर स्ट्राइक’ के रूप में सिंधु जल संधि को स्थगित करने के रूप में लिया था। उसका असर पाकिस्तान पर साफ दिखाई देने लगा है। जनता के भारी दबाव के चलते पाकिस्तान ने सिंधु जल समझौते पर पुनर्विचार के लिए भारत से गुहार लगाई है लेकिन भारत पाकिस्तान को दो टूक जवाब दे दिया है जब तक आतंकवाद खत्म नहीं होता तब तक सिंधु जल संधि पर कोई बात नहीं होगी।
इस्लामाबाद ने पहली बार सिंधु जल संधि की शर्तों पर बातचीत करने का संकेत दिया है। भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ 1960 से चली आ रही सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। मीडिया के अनुसार पाकिस्तान ने भारत की आपत्तियों पर चर्चा करने की पेशकश की है। ऐसा माना जाता है कि पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तजा ने हाल ही में भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा संधि को स्थगित रखने के निर्णय की औपचारिक सूचना पर प्रतिक्रिया दी है।
संधि को स्थगित करते ही बदले पाक के तेवर
रिपोर्ट में मामले से परिचित सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मुर्तजा ने हालांकि, निर्णय के आधार पर सवाल उठाया है। भारत की आपत्तियों पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तान की पेशकश विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि जनवरी 2023 में और फिर सितंबर 2024 में दो नोटिसों के बावजूद पाकिस्तान ने अब तक अपनी स्पष्ट इच्छा व्यक्त नहीं की है। अब भारत के तत्काल प्रभाव से संधि को स्थगित करने के बाद पाकिस्तान ने चर्चा में शामिल होने का संकेत दिया है। सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की इच्छा को लेकर भारत सरकार के भीतर चर्चा हो रही है। यह चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत नदी के पानी का उपयोग करने के लिए बांध और जलाशय बनाकर पानी को संग्रहीत करने और बिजली उत्पादन के लिए भी इसका उपयोग करने के लिए उत्सुक है। पाक ऐसी किसी भी स्थिति को रोकना चाहता है। इसके पहले वह नदी के पानी को रोकने के लिए होने वाले किसी भी निर्माण को लेकर बार-बार गीदड़ भभकी देता रहा है।
भारत के संदेश से घबराया पाकिस्तान
इसके पहले 24 अप्रैल को भारत के जल संसाधन सचिव देबाश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान को पत्र लिखकर संधि को स्थगित किए जाने की सूचना दी थी।

























