ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। इसरो के सबसे भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी के साथ जो कुछ भी हो रहा है, उसने देश की सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। लगातार दो बार जिस तरह से पीएसएलवी मिशन फेल हुए हैं, उसने इसरो की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। 12 जनवरी को पीएसएलवी-सी62 की नाकामी ने सबको झकझोर कर रख दिया है। इस रॉकेट में सर्विलांस सैटेलाइट ईओएस-एन1 और 15 दूसरे सैटेलाइट्स सवार थे। लॉन्चिंग की तीसरी स्टेज में ऐसी खराबी आई कि सब कुछ तबाह हो गय।
इससे पहले पिछले साल मई में भी पीएसएलवी-सी61 इसी तरह तकनीकी खराबी की भेंट चढ़ गया था। 90 परसेंट से ज्यादा का सक्सेस रेट रखने वाले इस रॉकेट के साथ अचानक ऐसा क्यों हो रहा है? इन नाकामियों के बीच नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) अजीत डोभाल की एंट्री ने मामले को और भी चर्चा में ला दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम नरेंद्र मोदी के निर्देश पर अजीत डोभाल ने विगत दिनों तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) का गुप्त दौरा किया। डोभाल का यह दौरा इतना सीक्रेट था कि इसकी खबर बाहर आने के बाद ही हड़कंप मच गया। आखिर देश के सुरक्षा प्रमुख को इसरो के सेंटर पर क्यों जाना पड़ा? क्या यह महज एक टेक्निकल रिव्यू था या फिर इसके पीछे किसी गहरी साजिश यानी सेबोटाज का शक है?
क्या पीएसएलवी की नाकामी के पीछे कोई बड़ी बाहरी साजिश है?
स्पेस मिनिस्टर जितेंद्र सिंह ने आधिकारिक तौर पर सेबोटाज की किसी भी संभावना से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि यह महज तकनीकी खराबी हो सकती है। हालांकि, दो बैक-टू-बैक फेल्योर के लिए इंटरनल और एक्सटर्नल असेसमेंट कमेटियां बना दी गई हैं। सिंह ने एक उदाहरण देते हुए समझाया कि पिछली बार अगर बल्ब फ्यूज हुआ था, तो इस बार बाहर से ट्रिपिंग हुई है। मतलब दोनों बार की दिक्क तें अलग-अलग हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर सब कुछ नॉर्मल है, तो अजीत डोभाल को दखल क्यों देना पड़ा? सुरक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब देश के जासूसी उपग्रह दांव पर हों, तो सरकार किसी भी रिस्क को हल्के में नहीं लेना चाहती।
पीएमओ की चिंता को दर्शाता है एनएसए का दौरा
अ जीत डोभाल का वीएसएससी दौरा सीधे तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय की चिंता को दर्शाता है। ईओएस-एन1 जैसे सर्विलांस सैटेलाइट देश की सीमा सुरक्षा के लिए बहुत अहम होते हैं। ऐसे में अगर लॉन्च के दौरान कोई गड़बड़ी होती है, तो यह केवल पैसों का नुकसान नहीं बल्कि नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ा मुद्दा बन जाता है। सूत्रों का कहना है कि डोभाल ने वैज्ञानिकों से डेटा एनालिसिस की बारीकियों पर चर्चा की है। वह यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कहीं रॉकेट के सिस्टम के साथ बाहर से छेड़छाड़ तो नहीं की गई है। इस दौरे ने उन अटकलों को हवा दी है कि कहीं भारत के बढ़ते स्पेस कद को कम करने के लिए कोई सिंडिकेट तो काम नहीं कर रहा है।

























