ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण के विवाद से जुड़े मुद्दे की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि इस देश में आरक्षण ट्रेन के डिब्बे की तरह हो गया है। यह तल्ख टिप्पणी जस्टिस सूर्यकांत ने की, जो इस साल के अंत तक देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे।
सुनवाई के दौरान जस्टिस कांत ने कहा, इस देश में जाति आधारित आरक्षण रेलगाड़ी के डिब्बे की तरह हो गया है और जो लोग इस डिब्बे में घुसते हैं वे फिर दूसरों को इसमें नहीं आने देते।
पीठ ने कहा कि महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण का विवादास्पद मुद्दा 2022 की रिपोर्ट से पहले जैसा ही रहेगा। मामले में कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य निर्वाचन आयोग को राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव की अधिसूचना चार सप्ताह के भीतर जारी करने का भी निर्देश दिया है।
पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि महाराष्ट्र राज्य में स्थानीय निकायों के लंबित चुनावों को ओबीसी आरक्षण के मुद्दे के कारण और विलंबित नहीं किया जा सकता। इसके बाद पीठ ने स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न कराने के लिए समयसीमा तय करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से इसे चार महीने में संपन्न करने को कहा। पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) को उचित मामलों में अधिक समय मांगने की स्वतंत्रता दी।
पीठ ने कहा कि महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे शीर्ष अदालत के समक्ष लंबित याचिकाओं पर फैसलों पर निर्भर करेंगे। शीर्ष अदालत ने 22 अगस्त, 2022 को एसईसी और महाराष्ट्र सरकार को राज्य में स्थानीय निकायों की चुनाव प्रक्रिया के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था।

























