ब्लिट्ज ब्यूरो
लखनऊ। घाघरा नदी के संजय सेतु की मरम्मत के लिए 60 दिन के लिए यातायात पूरी तरह से बंद होने की बात के बीच लखनऊ से बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा और बलरामपुर आने और जाने वालों के लिए राहत की खबर सामने आई है। घाघरा नदी पर बना संजय सेतु अब पांटून पुल बनने के बाद ही मरम्मत के लिए बंद होगा। गोंडा के पांच विधायकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर पुल बंद करने से पहले पांटून पुल की व्यवस्था करने की मांग की थी। मुख्यमंत्री योगी के निर्देश के बाद लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव अजय चौहान ने इस संबंध में एनएचएआई के परियोजना निदेशक को आदेश दे दिए हैं।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि लोनिवि के प्रमुख सचिव ने उन्हें पांटून पुल बनाने के बाद ही गांधी सेतु बंद करने के आदेश दिए हैं। पांटून पुल लोक निर्माण विभाग बनाएगा और इसक खर्च एनएचएआई वहन करेगा। पांटून पुल बनाने की लागत विभाग से इस्टीमेट आने के बाद ही पता चलेगी। मरम्मत के लिए पुल दो महीने बंद करने की योजना है।
जानकारी के मुताबिक पहले आवागमन के लिए पुल 10 फरवरी से बंद होना था। एनएचएआई ने इसके लिए पुल के उस पार पड़ने वाले जिलों से अनापत्ति मांगी थी। जिलों ने वैकल्पिक रास्ता होने तक अनापत्ति देने से इनकार कर दिया था। नकुल ने बताया कि पांटून पुल बनने में 15 से 20 मार्च तक का वक्त लग सकता है। प्रयागराज माघ मेला में लगा पांटून पुल यहां लाया जाएगा और फिर उसे घाघरा नदी पर बांधा जाएगा। पांटून पुल पर पैदल, छोटे वाहन आदि चलने की अनुमति होगी। भारी वाहनों को डायवर्ट किया जाएगा। यह काम पूरा होने के बाद ही संजय सेतु की मरम्मत हो सकेगी।
हजारों लोगों का रोजाना आवागमन
निर्माण साल 1981 में शुरू हुआ और तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह यानी वीपी सिंह ने 9 अप्रैल, 1981 को इसकी आधारिशला रखी थी. इससे बनने में 3 साल लगे और 1984 में इस पुल को जनता के लिए खोल दिया गया था। तब यह यूपी का सबसे लंबा पुल माना जाता था। फिलहाल पुल की हालत काफी जर्जर हो चुकी है।
























