ब्लिट्ज ब्यूरो
मधुबनी। भारत को गांव का देश कहा जाता है। गांव से निकली कई प्रतिभाओं ने देश भर में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। कई प्रतिभाओं को उनकी काबिलियत की वजह से पद्मश्री जैसे अवार्ड भी मिले हैं लेकिन बिहार में एक ऐसा गांव भी है, जिसने तीन-तीन पद्मश्री अवॉर्डी दिए हैं। इस गांव के लोगों की उंगलियों के ‘कमाल’ की वजह से गांव की देशभर में खास पहचान हैं। अब ये गांव बिहार का पहला शिल्पग्राम (क्राफ्ट विलेज) बनने जा रहा है।
गांव अब बनेगा शिल्पग्राम
बिहार का ये गांव है मधुबनी जिले के रहिका ब्लॉक का जितवारपुर गांव। इस गांव की पहचान मधुबनी पेंटिंग, पेपर माशे, सिक्क ी और टेराकोटा की वजह से है। अब इस गांव को बिहार का पहला शिल्पग्राम (क्राफ्ट विलेज) बनाया जाएगा। केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के नेशनल हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत इसकी बड़ी पहल की गई।
शिल्पग्राम बनाने में कितना खर्च होगा?
जितवारपुर को क्राफ्ट विलेज बनाने के लिए 9 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे। इसमें 80 फीसदी फंडिंग केंद्र सरकार और 20 फीसदी खर्च बिहार म्यूजियम से होगा। यह किसी भी राज्य में इस तरह के प्रोजेक्ट के लिए सबसे ज़्यादा आवंटन है। एक साल के अंदर पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। इससे जितवारपुर की ग्लोबल प्रोफाइल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है
कैसे बदलेगी तस्वीर?
मधुबनी आर्टवर्क वाला एक बड़ा एंट्रेंस गेट, रंगीन ईंट और पत्थर के बॉर्डर और पेड़ों से ढके तीन सरकारी तालाबों का रेनोवेशन, गांव की सड़कों को पक्का करना और करीब 100 स्ट्रीट लाइट लगाने का भी प्लान है। कलाकारों के मधुबनी मोटिफ पेंट करने के लिए घरों की बाहरी दीवारों पर सफेदी की जाएगी। इस प्रोजेक्ट में रांती और रैयाम जैसे आस-पास के आर्ट-सेंट्रिक गांवों में भी डेवलपमेंट को बढ़ाने का प्लान है।
गांव में किसे मिल चुका पद्मश्री?
जितवारपुर गांव में करीब 400 घर हैं। जितवारपुर को भारत का एकमात्र ऐसा गांव होने का गौरव हासिल है, जिसने तीन पद्म श्री अवॉर्डी दिए हैं। जगदंबा देवी (1975), सीता देवी (1980) और बउआ देवी (2017) को पद्मश्री मिला है। गांव में लगभग 90 फीसदी स्थानीय लोग खेती या सैलरी वाली नौकरियों के बजाय हैंडीक्राफ्ट पर निर्भर हैं। यहां हर घर एक आर्ट स्टूडियो की तरह काम करता है। इससे यह गांव मिथिला की कलात्मक परंपराओं का एक जीवंत केंद्र बन गया है। अब ये गांव शिल्पग्राम बनने जा रहा है।
शिल्पग्राम के पहले फेज में डाक बंगले में कॉमन फैसिलिटी सेंटर के पास मॉडर्न सुविधाओं वाला चार कमरों का गेस्ट हाउस बनाया जाएगा। एक अलग टॉयलेट ब्लॉक, पेपर माशे, सुजनी और टेराकोटा जैसे क्राफ्ट के 12 स्टॉल, साथ ही लैंडस्केपिंग और गार्डन डेवलपमेंट शामिल होगा। – अधिकारी, शिल्पग्राम योजना

























