ब्लिट्ज ब्यूरो
मुंबई। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने राज्य के दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों को भी एसटी बस सेवा से जोड़ने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मंत्री ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि अब गांव वहां एसटी नहीं, बल्कि आदिवासी पाड़ा वहां एसटी का नारा होगा। इस घोषणा के साथ महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन सेवा को उन इलाकों तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है, जहां आज तक केवल चलने का रास्ता हुआ करता था। खास बात यह है कि सह्याद्री और मेलघाट की पहाड़ियों और घाटियों में बसे कई आदिवासी पाड़े अब एसटी बसों से जोड़े जाएंगे।
अब तक बड़े आकार की बसों के लिए संकरे और घुमावदार रास्तों पर चलना संभव नहीं था, जिसके कारण स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था लेकिन अब मंत्री सरनाईक ने कहा कि यह स्थिति बदलेगी और एसटी सेवा सीधे इन पाड़ों तक पहुंचेगी, जिससे आदिवासी समाज को राज्य की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकेगा।
चलेगी ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी’ मिनी बसें
एसटी महामंडल, 9 मीटर लंबी और 35 सीटों वाली 100 अत्याधुनिक मिनी बसें खरीद रहा है। इन बसों का नाम ‘पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी’ रखा जाएगा। ये बसें विशेष रूप से संकरी सड़कों, मोड़ों और घाट क्षेत्रों के लिए डिजाइन की गई हैं, ताकि दुर्गम आदिवासी पाड़ों तक आराम से पहुंचा जा सके। मंत्री ने बताया कि इन बसों के जरिए उन क्षेत्रों में नियमित सेवा शुरू की जाएगी, जहां अब तक एसटी की पहुंच संभव नहीं थी।
इस योजना से विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए शहर तक पहुंचना आसान होगा, मरीजों को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
एसटी की बस अब परिवर्तन और प्रगति का प्रतीक बनेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य विकास की धारा को हर आदिवासी पाड़े तक पहुंचाना है, ताकि समता और अवसर की नई सुबह का मार्ग प्रशस्त हो सके।
– प्रताप सरनाईक, परिवहन मंत्री

























